लोहिड़ी के मौके पर ढोल पर थिरकीं लड़कियां।
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सर्द हवाओं में बोन फायर की तपिश जहां लोगों को सुकुन दे रही थी। वहीं ढोल पर थिरकते हर किसी के कदम देश की संस्कृति की बानगी, मौका था लोहड़ी पर्व का। लोहड़ी को लेकर शहर में जगह-जगह मूंगफली व गजक की दुकानें आकर्षक ढंग से सजी रही।
सूर्य ढलने के बाद धीरे-धीरे लोहड़ी जलाना शुरु किया गया। गीत-संगीत व ढोल-नगाड़ों की तान पर लोगों ने जमकर भांगड़ा किया। शहर के हर गली मोहल्ले में ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीतों पर नृत्य करके लोहड़ी जलाई गई।
इस दौरान महिलाओं ने ‘आओ भांगड़ा पाए इस बार, फिर आ गई भंगड़े दी बारी, लोहड़ी मनोदी करो तैयारी, आग दे कोल सारे आओ, सुंदरी-मुंदरी जोर नाल गाओ आग गई लोहड़ी वे बना लो जोड़ी’ जैसे पारंपरिक गीत गाएं और मन्नतें मांगी। साथ ही अगली साल और बड़ी लोहड़ी जलाने की प्रार्थना की। बच्चे, बड़े और बुजुर्ग ने एक-दूसरे को गले मिलकर लोहड़ी बधाई दी। इसके बाद मूंगफली, गजक, रेवड़ी और मक्की के फूलों का आनंद उठाया।