राजधानी दिल्ली में रविवार का दिन साल का दूसरा सर्वाधिक प्रदूषण वाला दिन रहा। इससे पहले दीपावली के अगले दिन आठ नवंबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक साल के सर्वाधिक 541 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक वायु गुणवत्ता सूचकांक 446 पर पहुंच गया जबकि सफर के मुताबिक रविवार को हवा की गुणवत्ता का सूचकांक पूरे दिन में अधिकतम 471 था। अगले तीन दिनों के दौरान राजधानी में प्रदूषण स्तर खतरनाक बने रहने की आशंका है, जिसपर एजेंसियां लगातार नजर रख रही हैं। अगले 48 घंटे दौरान भी अगर प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं आया तो कारों के न्यूनतम इस्तेमाल, निर्माण पर पाबंदी जैसे कुछ और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
रविवार को राजधानी दिल्ली के 30 अलग-अलग इलाकों की वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब रहा। अशोक विहार, आनंद विहार और वजीरपुर क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता बेहद नाजुक बनी रही, जिसे आपतकालीन श्रेणी में रखा गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गाजियाबाद में यह सूचकांक 473 पर रहा जबकि फरीदाबाद और नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक अगले पांच दिनों तक के दौरान कम तापमान और हवा की सुस्त रफ्तार के कारण प्रदूषण के जिम्मेवार कण भी आसपास ही मंडराते रहेंगे। इस वजह से अगले तीन दिनों तक मौजूदा हालात में केई बदलाव के आसार कम बताए गए हैं।
प्रदूषण में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए सीपीसीबी के नेतृत्व में गठित टास्क फोर्स ने अगले दो दिनों के दौरान लोगों को घरों से कम से कम बाहर निकलने और वाहनों के न्यूनतम इस्तेमाल की सलाह दी है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक राजधानी की हवा में पीएम (2.5) 402 जबकि पीएम (10) 580 रिकॉर्ड किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक अगर 200-300 के स्तर पर हो तो इन्हें खराब माना जाता है। 300-400 के सूचकांक को बेहद खराब जबकि 400-500 के वायु गणवत्ता सूचकांक को खतरनाक माना गया है।