50 वर्ष से पुरानी दिल्ली के दरियागंज में लगने वाली बुक मार्केट रविवार को महिला हाट में एक बार फिर शुरू हो गई। देश-विदेश के प्रकाशकों की किताबों के कद्रदानों में इस मार्केट के शिफ्ट होने से खुशी झलकती दिखी।
किताब विक्रेताओं के लिए भी यह एक बेहतरीन मौका है, जब किताब खरीदने के लिए पहुंचने वालों को न तो वाहनों के पार्किंग और जेबकतरों का खतरा है। इस सुविधा के लिए दुकानदारों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्हें इस बात की खुशी है कि तमाम सुविधाओं के बीच हर उम्र के पढ़ने की चाहत रखने वालों की जरूरतें पूरी करने का मौका मिला है।
पिछले 30 वर्षों से दरियागंज में पुराने और नई किताबों की बिक्री करने वाले सतीश ने बताया कि संडे मार्केट के शिफ्ट होने से उन्हें और खरीदारों को और अधिक सहूलियतें मुहैया करवाई गई हैं। इस कार्य के लिए उत्तरी दिल्ली नगर निगम की पहल तारीफ के काबिल है, हालांकि ओपन तहबाजारी के लिए यहां शुल्क थोड़ा अधिक है।
दुकानदार जियालाल ने बताया कि यहां किताबें हर वर्ग के लिए होती हैं। उनकी कीमत अमूमन 50 फीसदी या इससे कम होती है। कई बार खरीदारों की जरूरतों को देखते हुए भी रेट तय होते हैं। एमसीडी की ओर से किताबों के लिए 6 गुणा 4 वर्ग फुट जगह दी गई है। जिसके लिए हर सप्ताह बकायदा 185 रुपये की पर्चियां कटने लगी हैं।
एमसीडी कर्मी सुनील ने बताया कि यहां पार्किंग, टॉयलेट सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं ताकि किताबों की खरीदारी को किसी तरह की परेशानी न आए।
पुरानी दिल्ली की बुक मार्केट को मिली नई पहचान
दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के अलावा छोटे बच्चों के लिए भी संडे बुक मार्केट आकर्षण का केंद्र बनने लगा है। पहले दिन ही किताबें खरीदने से पहले, स्टॉल के बैठकर पढ़ते कुछ बच्चे भी दिखे। खरीदारों का कहना है कि यह पुरानी दिल्ली की पहचान थी, जिसे नई शक्ल दी गई है।