देश-विदेश में लावारिस हालत में मृत पाए गए करीब 8500 हिंदुओं की अस्थियां वैदिक रीति से गंगा में प्रवाहित की जाएंगी। इनकी 20 सितंबर को कलश यात्रा निकाली जाएगी, इसके बाद हरिद्वार ले जाकर कनखल स्थित घाट पर अस्थि विसर्जन किया जाएगा। यह अस्थियां देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी एकत्रित की गई हैं।
संस्था श्री श्री देवोत्थान सेवा समिति के महामंत्री विजय शर्मा ने बताया कि संस्था के सदस्य 2003 से लावारिस अस्थियों के विसर्जन के कार्य में जुटे हैं। दिल्ली से इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा सहित अन्य प्रदेशों से भी अस्थियां एकत्रित की जाने लगीं। इन अस्थियों को पितृपक्ष में बैंड बाजे के साथ विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाया जाता है।
आगामी 18 सितंबर को निगम बोध घाट पर 8500 शवों की अस्थियां लाई जाएंगी। यहां इनकी गंगाजल, केवड़ा आदि से सफाई की जाएगी और कपड़े की थैलियों में रखा जाएगा। इसके बाद 20 सितंबर को 14 किलोमीटर की यात्रा निकाली जाएगी और फिर मोक्ष प्राप्ति के लिए हरिद्वार ले जाया जाएगा।
इस बार पाकिस्तान, सिंगापुर और दुबई से भी उन मृतकों की अस्थियां मंगाई गई हैं, जिनका कोई वारिस नहीं है। अस्थियों का वजन करीब 85 किलोग्राम बताया जा रहा है।
गंगा दशहरा से होती है एकत्र करने की शुरुआत
लावारिश शवों का दाह संस्कार करने के बाद गंगा दशहरा से अस्थियां एकत्रित की जाती हैं। संस्था के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र के मुताबिक इससे पहले 2011 में पाकिस्तान से 135 लोगों की अस्थियां लेकर कराची से एक प्रतिनिधिमंडल आया था। इसके बाद 2016 में 160 हिंदुओं की अस्थियों को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित किया गया।