सुनंदा पुष्कर, शशि थरुर (फाइल फोटो)
दिल्ली पुलिस सुनंदा पुष्कर मौत मामले में मनोवैज्ञानिक पोस्टमोर्टम की बात पर भरोसा कर रही है, लेकिन जो उसने खुद ट्वीटर व बीबीएम पर मौत से पहले लिखा उस पर भरोसा नहीं कर रही है। मौत से पहले उसके इन संदेशों में काफी पॉजीटिव बातें लिखीं गई हैं।
यह दलील कांग्रेस सांसद शशि थरूर की ओर से आरोपों पर जिरह करते हुए उनके वकील ने कोर्ट में दी। सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को होटल लीला में मृत पाई गई थीं और दिल्ली पुलिस ने मई 2018 में आरोप पत्र दाखिल किया था।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहार के समक्ष शशि थरूर की ओर से जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र के साथ मनोवैज्ञानिक पोस्ट मोर्टम रिपोर्ट कोर्ट में पेश की है। यह रिपोर्ट डॉक्टरों ने सुनंदा के परिवार, उसके दोस्तों, जानकारों व नौकरों से बातचीत के आधार पर तैयार की थी लेकिन पुलिस ने उस संदेशों को कोर्ट में पेश नहीं किया जो उसने खुद मौत से पहले लिखे थे।
कांग्रेस सांसद की ओर से विकास पाहवान ने कहा कि सुनंदा पुष्कर ने 17 जनवरी 2014 की सुबह करीब पौने बजे भी अपने ट्वीटग पर संदेश पोस्ट किया था। इनमें उसने बेहद सकारात्मक बातें लिखी थीं। इन्हें पढ़कर कहीं लगता कि वह किसी दबाव में थी और खुदकुशी कर सकती थी।
बचाव पक्ष ने यह दलील उस अर्जी पर जिरह करते हुए रखी, जिसमें सुनंदा के मौत से पहले लिखे संदेशों को कोर्ट में पेश करवाने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस अर्जी पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख तय की गई है।