अदालत ने मंगलवार को ओडिशा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आई एम कुद्दुसी समेत अन्यों को कथित रूप से उच्च स्तर के अधिकारियों से साठगांठ करके उच्चतम न्यायालय के फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप में तलब किया। इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2020 को तय की गई है।
विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार सिसोदिया ने आईएम कुद्दुसी और छह अन्य को के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए उन्हें 9 जनवरी 2020 को अदालत के समक्ष उपस्थित होने के लिए समन जारी किया है।
अदालत ने कुद्दुसी के अलावा इस मामले में आरोपी लखनऊ में मेडिकल कॉलेज चलाने वाले प्रसाद शिक्षण न्यास के बी पी यादव और पलाश यादव, कथित बिचौलिया विश्वनाथ अग्रवाल, कथित हवाला करोबारी रामदेव सारस्वत, भावना पांडे और सुधीर गिरि को भी अदालत में पेश होने के लिए कहा है।
न्यायाधीश ने कहा कि आरोप पत्र, गवाहों के बयान और आरोप पत्र के साथ जमा दस्तावेजों के आधार पर मेरी राय है कि अपराध का संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त सामग्री है। इसलिए मैं अपराध का संज्ञान लेता हूं...आरोपी संख्या एक से आरोपी संख्या सात को अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने के लिये समन जारी किया जाता है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सातों आरोपियों पर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बीपी यादव के प्रसाद आयुर्विज्ञान संस्थान में अकादमिक वर्ष 2017-18 और 2018-19 में प्रवेश लेने पर रोक लगा दी थी जिसके बाद यादव ने उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायलय से संपर्क किया।
इस मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में उस समय की गई जब कथित तौर पर यादव ने कुद्दुसी और पांडे से उच्च स्तर पर अधिकारियों से साठगांठ कर मामले को सुलझाने के लिए संपर्क किया। आरोप पत्र के मुताबिक भुवनेश्वर के रहने वाले अग्रवाल ने दावा किया वरिष्ठ अधिकारियों से करीबी संबंध का इस्तेमाल कर वह इस मामले का उनके पक्ष में समाधान करा देगा।
यह भी बताया कि गया कि इस मामले में सीबीआई ने अग्रवाल से एक करोड़ रुपये जब्त किए थे। यह राशि कथित तौर पर सारस्वत के जरिये अग्रवाल के पास पहुंची थी, जबकि 91.90 लाख रुपये अन्य आरोपियों के परिसरों में छापेमारी के दौरान बरामद किए गए।