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पिंकी पर अन्याय से भड़का लोगों का गुस्सा

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छात्रा पिंकी को इंसाफ दिलाने के लिए छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ सामाजिक संगठन राजपूत महासभा और निर्मला चाइल्ड एंड वूमेन वेलफेयर फाउंडेशन भी एक मंच पर आ गया है। सभी संगठनों ने एकजुट होकर छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए मुहिम छेड़ने की बात कही है।
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मंगलवार को गर्वमेंट गर्ल्स कॉलेज सेक्टर-14 खुलने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगा। इस बात की घोषणा संगठनों की सामूहिक प्रेसवार्ता में की गई।
   
एबीवीपी के जिला संयोजक संजय चौहान ने आरोप लगाया कि पुलिस और जिला प्रशासन सरकार के दबाव में आरोपी का बचाया जा रहा है। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए मंगलवार से एबीवीपी अभियान शुरू करेगा। इसके लिए एबीवीपी इकाई पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाने की रणनीति तय किया है।
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संजय ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ बचाव की मुद्रा में है, जबकि पिंकी के परिवार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से भी कराने की मांग की।

राजपूत महासभा के रविंद्र राघव ने कहा कि किस स्थिति में पिंकी आत्मदाह करने को मजबूर हुई? इस पर जांच होनी चाहिए। जो भी दोषी हो, उसको सजा मिले। चाइल्ड एंड वूमेन वेलफेयर फाउंडेशन के सलाहकार पंकज गेरा ने बताया कि छात्रा को इंसाफ दिलाने के साथ संस्था की ओर से इलाज के लिए पहल की जाएगी। जो भी खर्च होगा, उसे उठाया जाएगा।

बीएएसी की छात्रा पिंकी चौहान के आत्मदाह के प्रयास मामले में अबतक हुई पुलिसिया कार्रवाई के प्रति नाराजगी दिखनी शुरू हो गई है। रविवार को पीड़िता के गांव पंचायत में हुई पंचायत में प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। जिसमें दोषियों को गिरफ्तार करने के अलावा पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच की मांग की गई है। पंचायत ने दो टूक मे कहा कि 48 घंटे में प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन का रूख भी अख्तियार कर सकते है।
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पुलिस के रवैये से नाराजगी

कासन के राजपूत धर्मशाला में हुई पंचायत में पीड़िता के ताऊ धीरसिंह ने कहा मामले को एक सप्ताह होने के बावजूद पुलिस की तरफ से अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने दोषी महिला प्रोफेसर का नाम लेने के बावजूद अबतक पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की है। उन्होंने कहा कि पीड़िता पर बयान बदलने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

उन्होंने कॉलेज प्रबंधन के अलावा प्रशासन पर भी इसका आरोप लगाया। उन्होंने पीड़िता के इलाज को लेकर भी कोताही बरतने का आरोप लगाया है। पूर्व सरपंच महेश ने कहा कि इस मामले में अगर जल्द ही दोषियों की गिरफ्तार किया जाए। शाम साढ़े चार बजे शुरू हुई पंचायत में आसपास के करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों की आयोजित पंचायत के बाद प्रशासन को 48 अल्टीमेटम दिया। जिसमें पंचायत ने साफ तौर पर कहा कि पीड़िता के मामले में पंचायत कोई कोताही नहीं बरतेगा।

प्रशासन अगर 48 घंटे में मामले की जांच कर तस्वीर साफ नहीं की तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन भी कर सकते है। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार रहेगा। पीड़िता के मामले में अबतक चुप बैठे ग्रामीणों की चेतावनी के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी खलबली मच गई है। वहीं, इस पंचायत के बाद सीआईडी ने भी पूरी रिपोर्ट ली है। बताया जा रहा है कि मुख्यालय स्तर पर पूरे मामले की निगरानी रखने के आदेश दिए गए है। लिहाजा सीआईडी ने पंचायत की पूरी रिपोर्ट मुख्यालय को अवगत करा दी है।

इन गांवों के लोग हुए शामिल
बुढेड़ा, मानेसर, कांकरौला, भांगरौला, माकडौला, बास कुसला, बास हरिया, खोह, नाहरपुर, सहरावन, भोंडसी, खेड़ला के सरपंच, पूर्व सरपंच समेत कई अन्य गांवों के ग्रामीणों ने पंचायत में शामिल होते हुए प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है।

तीन मुख्य मांगे
--प्रशासन अस्पताल में पीड़िता के लिए उचित चिकित्सा इंतजाम कराए।
--पुलिस दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें, उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
--पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज निष्पक्ष जांच करें।
पीड़िता के ताऊ-सात दिन बीत गया पुलिस ने अबतक कोई कार्रवाई नहीं की। परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। पिंकी को इंसाफ दिलाने के लिए हम आंदोलन भी कर सकते है।
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