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Delhi NCR News: दुर्लभ खोपड़ी टीबी से जूझ रहे मरीज का सफल इलाज

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नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने 53 वर्षीय मरीज का सफल इलाज कर उसे फिर से आत्मनिर्भर जीवन जीने लायक बना दिया। मरीज को करीब ढाई साल में नौ बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और छह सर्जरी करानी पड़ीं।
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शुरू में ब्रेन हेमरेज हुआ, बाद में खोपड़ी की हड्डी में टीबी जैसी बेहद दुर्लभ समस्या भी पैदा हो गई। सेमी-कोमा की हालत से निकलकर अब वह बिना मदद के चलने-फिरने लगा है। मरीज को अचानक बेहोशी की हालत में इमरजेंसी में लाया गया था। दिमाग में तेज सूजन और ब्लीडिंग के जोखिम के बावजूद डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी कर खून का थक्का निकाला। खोपड़ी का एक हिस्सा अस्थायी रूप से खुला छोड़ना पड़ा। लंबे वेंटिलेटर सपोर्ट और एक महीने की गहन देखभाल के बाद उनकी लौ रिकवरी के दौरान दौरे पड़े, खोपड़ी की हड्डी दोबारा लगानी पड़ी, फिर थक्का बनने से एक और सर्जरी हुई। बाद में घाव से स्राव होने पर पता चला कि खोपड़ी की हड्डी में टीबी हो गया है, जो ब्रेन सर्जरी के बाद बहुत दुर्लभ है। संक्रमित हड्डी हटानी पड़ी। टीबी दिमाग और रीढ़ तक फैल चुका था। बीच में गिरने से जांघ की हड्डी भी टूट गई। आखिर में कस्टम पीईईके इंप्लांट लगाकर खोपड़ी का हिस्सा फिर से बनाया गया। एंटी-टीबी दवाओं से आंशिक नजर कमजोर होने पर इलाज में बदलाव किया गया। ढाई साल तक न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स समेत कई विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर इलाज किया। टीम का नेतृत्व प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं एचओडी, न्यूरो एंड स्पाइन सर्जरी डॉ. सोनल गुप्ता ने किया। ब्यूरो
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