13 हजार टन रोजाना कचरे के निस्तारण पर एमसीडी-आईआईटी दिल्ली की कार्यशाला, खाद-बायोगैस और रिसाइक्लिंग पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में रोजाना निकलने वाले करीब 13 हजार मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए एमसीडी अब ‘वेस्ट-टू-लैंडफिल’ के बजाय ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल पर काम करेगा। यानी कचरे को लैंडफिल में डालने के बजाय उससे खाद, बायोगैस और पुनर्चक्रित सामग्री तैयार कर आर्थिक उपयोग में लाया जाएगा। मंगलवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एमसीडी और आईआईटी दिल्ली की ओर से आयोजित कार्यशाला में इस रणनीति पर मंथन हुआ।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि कचरा प्रबंधन सिर्फ सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा है। दिल्ली को इंदौर समेत सफल शहरों के मॉडल का अध्ययन कर अपनी जरूरत के मुताबिक लागू करना चाहिए। उन्होंने कचरा कम करने, पुन: उपयोग और रिसाइक्लिंग बढ़ाने के साथ तकनीक व डिजिटल निगरानी से जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने बताया कि जैविक कचरे से खाद और बायोगैस तथा सूखे कचरे से उपयोगी सामग्री की रिकवरी व रिसाइक्लिंग पर काम चल रहा है। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जीरो-वेस्ट वार्ड, कॉलोनी और सड़क के लिए नागरिक भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।