अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने सात महीने के इंडो-त्रिनिडाडियन मूल के बच्चे एरिक रामसूक का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया है। एरिक का वजन चार किलोग्राम से भी कम था और वह लिवर की दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी से पीड़ित था। एरिक का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के मोराडीहा गांव का रहने वाला है। एरिक का जन्म भी वहीं हुआ। जन्म के कुछ हफ्ते बाद उसे पीलिया हो गया, जो बाद में गंभीर लिवर रोग में बदल गया।
जब एरिक को इलाज के लिए दिल्ली लाया गया, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी। वह अंतिम चरण के लिवर फेलियर, गंभीर कुपोषण, पेट में पानी भरने और लिवर से जुड़ी अन्य जटिल समस्याओं से जूझ रहा था। डॉक्टरों ने जांच के बाद तत्काल लिवर ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया। परिवार के भारत पहुंचने के एक सप्ताह के भीतर ही डॉक्टरों की टीम ने लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर दिया। शुरुआत में एरिक के पिता की जांच की गई, लेकिन वे डोनर बनने के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए। इसके बाद उसकी मां ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया।
ऑपरेशन के बाद हुई जेनेटिक जांच में पता चला कि एरिक टीजेपी2 म्यूटेशन नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित था। लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के हेड और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि दुनिया में इस बीमारी से प्रभावित बहुत कम बच्चों का लिवर ट्रांसप्लांट हुआ है। अस्पताल में अब तक किए गए 645 बाल लिवर ट्रांसप्लांट में यह ऐसा केवल दूसरा मामला है। वहीं, ऑपरेशन के 15 दिन बाद एरिक को अस्पताल से छुट्टी मिल गई और उसकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।