हाशिमपुरा सामूहिक हत्याकांड में पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम की कथित संदिग्ध भूमिका की जांच कराई जाए। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार को यह निर्देश देने का आग्रह किया है।
उनका आरोप है कि यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहे पी चिदंबरम हाशिमपुरा नरसंहार के बाद मौके पर गए और जांच को प्रभावित किया। ऐसे में उन्हें भी इस मामले में आरोपी बनाया जाए और मामले की फिर से जांच करवाई जाए।
स्वामी ने हाईकोर्ट के समक्ष ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने चिदंबरम की भूमिका की जांच करवाने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। स्वामी ने यह भी दावा किया कि समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सरकार ने इस मामले से संबंधित दस्तावेजों को नष्ट करना शुरू कर दिया है।
पीएसी के जवानों पर 42 लोगों की हत्या का आरोप है
अदालत
- फोटो : file photo
बता दें कि 1987 में हुए दंगों के दौरान प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) के जवानों पर 42 लोगों की हत्या का आरोप है। आरोपी पीएसी के 16 जवानों को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी करने के खिलाफ दायर अपील पर भी खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ही पीड़ितों के बच्चों ने चुनौती दी है। न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने यूपी सरकार को इस मामले से संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा है।
साथ ही एनएचआरसी द्वारा उठाए गए मुद्दे पर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई 19 मई तय की गई है।
गोली मारकर हत्या के बाद उनके शव नहर में फेंक दिए
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
सुनवाई के दौरान स्वामी ने यह भी कहा कि इस मामले में अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच होनी चाहिए। अदालत ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि इस प्रकार से यदि अतिरिक्त आवेदन आते रहे तो सुनवाई में अनावश्यक रूप से देरी होगी।
मेरठ जिला स्थित हाशिमपुरा में 22 मई 1987 को बड़ी संख्या में पीएसी के जवान पहुंचे। वहां से मस्जिद के सामने चल रही धार्मिक सभा में से मुस्लिम समुदाय के करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया।
आरोप था कि फिर इनमें से 42 लोगों को गोली मारकर हत्या करने के बाद उनके शव नहर में फेंक दिया गया।