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सुबोध की तत्परता से बची थी दानिश की जान: जान मोहम्मद

Wed, 05 Dec 2018 04:13 AM IST
संदीप वर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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inspector subodh kumar - फोटो : अमर उजाला
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सुबोध कुमार सिंह तेज तर्रार अधिकारी के रूप में विख्यात थे। बिसाहड़ा कांड में इकलाख के घर पर हमले की जानकारी मिलते ही उन्होंने अपने हमराह और सिपाहियों के साथ जारचा थाने से बिसाहड़ा घटनास्थल की 12 किलोमीटर दूरी मात्र 15 से 20 मिनट में पूरी कर ली थी। उन्होंने भीड़ को समझाकर इकलाख और उनके घायल बेटे दानिश को अस्पताल भेज दिया था। समय से इलाज मिलने से दानिश की जान बच गई थी। 

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इकलाख के छोटे भाई जान मोहम्मद ने मंगलवार को यह बातें साझी कीं। गौतमबुद्धनगर के बादलपुर में पहली बार थानाध्यक्ष की तैनाती मिलने के कुछ दिन बाद ही उनका स्थानांतरण जारचा थाने में हो गया था। यहां करीब पांच महीने ही उनको हुए थे कि 28 सितंबर की रात करीब दस बजे उनके पास बिसाहड़ा घटना का फोन आया।

वे उस समय जारचा थाने परिसर में वर्दी उतारकर खाना खाने जा रहे थे। जैसे ही सूचना मिली तो सुबोध ने चिल्लाकर चालक को गाड़ी निकालने के लिए बोलते हुए वर्दी पहनी। यहां तक कि वह नंगे पैर ही जीप में बैठ गए और जीप में ही जूते और पूरी वर्दी पहनी थी। वहां पहुंचकर भीड़ को किसी तरह से समझाते हुए उन्होंने इकलाख और दानिश को अस्पताल पहुंचाने के लिए भिजवाया। जहां इकलाख ने दम तोड़ दिया लेकिन दानिश की जान बच गई।
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इकलाख और दानिश को उठाने गए सुबोध से हुई थी धक्का-मुक्की     
बिसाहड़ा पहुंचने पर सुबोध समेत उनके हमराह और सिपाहियों को भीड़ के रोष का भी सामना करना पड़ा था। इस दौरान गोहत्या का आरोप लगा रही भीड़ में से कुछ लोगों ने सुबोध और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों से धक्का मुक्की की थी। लेकिन सुबोध ने कुछ को समझाते हुए तो कुछ को डांट-फटकार करते हुए दानिश और इकलाख को अस्पताल भेजा था।   

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