बच्चों पर बढ़ रहा पढ़ाई का दबाव
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बच्चों में बढ़ते प्रेशर और मां-बाप की उपेक्षा भी परिस्थितियों को नकारात्मक दिशा देती है। यदि किसी छात्र के घर में हथियार है, तो उसे बच्चों की पहुंच से दूर होना चाहिए। साथ ही अभिभावकों का दायित्व है कि बच्चों को उसके नुकसान और सही गलत के बारे में जानकारी दें। कई बार यदि शिक्षक छात्रों को डांटते हैं, तो अभिभावक उनके लिए लड़ने आ जाते हैं, बिना यह सोचे कि कहीं हमारा बच्चा गलत रास्ते पर तो नहीं जा रहा है। शिक्षकों अभिभावकों सभी को अपनी नैतिक जिम्मेदारियां समझनी चाहिए।- मंजू शर्मा, प्राचार्या, राजकीय डिग्री कॉलेज
सबको मिलकर उठाने होंगे कदम
शिक्षक का दर्जा बेहद ऊंचा है। उसे उसके हिस्से का सम्मान प्राप्त होना ही चाहिए। यदि छात्र को शिक्षक डांट भी रहे हैं तो उनकी भलाई के लिए ही डांट रहे हैं। यह बात सभी को समझनी चाहिए । वर्तमान समय में छात्रों पर प्रेशर बढ़ रहा है इसलिए वह सही गलत का अंतर समझने में नाकाम हो रहे हैं, इस स्थिति को बदलने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों सभी को कदम उठाने होंगे।- अरुण यादव, छात्रसंघ अध्यक्ष
मनोचिकित्सक डॉ. जी आर गुलेचा के अनुसार जिस तरह छात्रों द्वारा अक्रामक घटनाएं बढ़ रही हैं छात्रों का मेंटल हेल्थ चेकअप होना आवश्यक हो रहा है। जिस तरह लोग रूटिन हेल्थ चेकअप कराते हैं, उसी तरह नियमित रूप से मेंटल हेल्थ चेकअप भी जरूरी बन रहे हैं।
अपरिपक्वता की वजह से कई बार स्थितियां बेहद गंभीर हो जाती हैं। बच्चे हों या बड़े अप्रत्याशित घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते वक्त कई बार लोग संयम खो देते हैं। बढ़ती आक्रमकता का कारण सामाजिक माहौल, इंटरनेट एडिक्शन, बढ़ता प्रेशर कई हैं।
इस स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि अभिभावक और शिक्षक संयम से काम लें। छात्रों को समझने और उन्हें सही गलत समझाने का प्रयास करें। अपने अहम को खुद पर हावी होने से रोके, और यदि आपको लगता है कि आप अपने अहम को कंट्रोल करने में असमर्थ हैं, तो मनोचिकित्सकों की सलाह अवश्य लें।