बवाना औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित गोदाम के मेन गेट पर ताला लगा था। इसके चलते आग लगने के वक्त वहां काम कर रहे लोग बाहर नहीं निकल पाए और हादसे का शिकार हो गए। मारे गए 17 लोगों में से 14 की पहचान हो गई है। 12 शवों को परिजनों के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी है।
रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त रजनीश गुप्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए गोदाम मालिक मनोज जैन के खिलाफ विस्फोटक एक्ट लगाया गया है। पहले पता चला था कि गोदाम को जैन और ललित गोयल मिलकर चला रहे थे लेकिन जांच में पता चला कि ललित का गोदाम से कोई लेना-देना नहीं है।
मनोज की पहले बवाना में ही खिलौने की फैक्ट्री थी लेकिन नुकसान होने पर उसने उसे बंद कर इसी माह एफ-83 परिसर किराये पर लिया था। उसने माना कि गोदाम के लिए किसी भी विभाग से एनओसी नहीं ली थी। वह पटाखों और होली के रंगों की पैकिंग करता था।
मामले की जांच अपराध शाखा को सौंपी गई
bawana fire
- फोटो : अमर उजाला
इसके लिए किसी एनओसी की जरूरत नहीं होती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फैक्ट्री मालिक ने प्लास्टिक दाने का लाइसेंस उत्तरी दिल्ली नगर निगम से लिया था। उपराज्यपाल अनिल बैजल समेत कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने रविवार को घटनास्थल का दौरा किया।
पटाखों के डिब्बे मिले
पुलिस को गोदाम से होली का धमाका और ल्योपर्ड किंग नामक ब्रांड के पटाखों के डिब्बे मिले हैं। रविवार को फिर एफएसएल की टीम घटनास्थल पहुंची और पुलिस के साथ मिलकर चार घंटे तक छानबीन की।
घायलों का इलाज हो रहा
हादसे के समय दूसरी मंजिल से कूदकर जान बचाने वाले रूप प्रकाश सिंह और सुनीता का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है।
50-55 मजदूर करते थे काम
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अलग-अलग शिफ्ट में यहां 50 से 55 मजदूर काम करते थे। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। लेबर सुपरवाइजर अजीत रंजन (22) ने मजदूरों का इंतजाम किया हुआ था।
उसने मनोज के साथ मिलकर सभी मजदूरों की अलग-अलग सैलरी भी तय की हुई थी। एक समय में 20-25 लोग ही फैैक्टरी में काम करते थे। पुलिस की मानें तो हादसे के समय सुपरवाइजर अजीत रंजन फैक्टरी में ही मौजूद था। आग में झुलसने से उसकी भी मौत हो गई।
बीएसए अस्पताल में हेल्प डेस्क
दिल्ली पुलिस ने मृतकों की पहचान के लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर अस्पताल में एक हेल्प डेस्क बनाई थी। वहां शाहबाद डेयरी थाने के पुलिस अफसरों की तैनाती की गई थी। इनकी मदद से शाम तक 14 शवों की पहचान हुई। हादसे के बाद लापता लोगों के परिजन भी हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकते हैं।
जान गंवाने वाले इन लोगों की हुई पहचान
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1. अफसाना पत्नी मुख्तार (42) निवासी 161, कटेरा, शिकारपुर, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश।
2. राजो पत्नी सुरेश (65) निवासी बी-589, मेट्रो विहार, फेस एक होलंबीकलां, दिल्ली।
3. रीता पुत्री राजू (18) निवासी बी-592, मेट्रो विहार, फेस एक होलंबीकलां, दिल्ली।
4. मदीना पत्नी नसीरुद्दीन (55) निवासी बी-592, मेट्रो विहार, फेस एक होलंबीकलां, दिल्ली।
5. बेबी देवी पत्नी गिरीधारी दास (40) निवासी बी-589, मेट्रो विहार, फेस एक होलंबीकलां, दिल्ली।
6. सोनम पुत्री बंटूलाल (23) निवासी ए-296, मेट्रो विहार, फेस एक होलंबीकलां, दिल्ली।
7. सूरज पुत्र श्याम बिहारी निवासी एफ 83 बवाना सेक्टर पांच, दिल्ली।
8. रविकांत पुत्र देवेंद्र प्रताप (20) निवासी गांव चांदपुर, जहांगीरगंज, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश।
9. अजीत रंजन (22) निवासी गांव किलवाड़ी बांका बिहार।
10. सुखदा पत्नी महिपाल (42), निवासी गांव हरिहरपुर, सीतापुर, उत्तर प्रदेश।
11. खुसना पत्नी विश्वपाल (47) निवासी गांव गंगापुर, सीतापुर, उत्तर प्रदेश।
12. सोनी पुत्री सोबरन निवासी हाजीपुर, सीतापुर, उत्तर प्रदेश।
13. रोहित पुत्र अजय चंदर सिंह (19) निवासी अजमतगढ़ी, उन्नाव, उत्तर प्रदेश।
14. संजीत पुत्र राममूरत सिंह (19) निवासी अजमतगढ़ी, उन्नाव, उत्तर प्रदेश।