हर मिनट में नोटिफिकेशन देखने की आदत और हर समय मोबाइल को हाथ में रखने की स्टाइल अब एक लत बन गई है। इससे छुटकारा तो लोग पाना चाहते हैं पर वह उनसे संभव नहीं हो पाता। सोशल मीडिया से वह ज्यादा देर तक दूर नहीं रह पाते। कई लोग तो ऐसे भी हैं जो कि सोते हुए उठकर फोन चलाने लगते हैं।
अब नए अध्ययन में सामने आया है कि यदि स्मार्टफोन का इस्तेमाल कुछ समय के लिए सीमित कर दिया जाए तो दिमाग की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। जर्नल कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि सिर्फ 72 घंटे तक स्मार्टफोन का सीमित इस्तेमाल करने से दिमाग के रिवॉर्ड सेंटर की सक्रियता कम हो जाती है, जबकि ध्यान और आत्म-नियंत्रण से जुड़े हिस्से अधिक सक्रिय हो जाते हैं। अध्ययन में 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 25 युवाओं को शामिल किया गया था।
शोध के दौरान प्रतिभागियों को 72 घंटे तक स्मार्टफोन का उपयोग सीमित रखने के लिए कहा गया। प्रयोग से पहले और बाद में प्रतिभागियों के दिमाग की गतिविधि को एफएमआरआई स्कैन के जरिए जांचा गया। परिणाम में पाया गया कि तीन दिनों में ही स्मार्टफोन से जुड़े संकेतों पर दिमाग की प्रतिक्रिया में बदलाव दिखाई दिखा।
फोन फॉग बन रही नई समस्या : विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से फोन फॉग जैसी समस्या देखने को मिल रही है। इसमें व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, मानसिक थकान और नींद से जुड़ी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। लगातार नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया के कारण दिमाग को आराम नहीं मिल पाता।
डिजिटल ब्रेक से दिमाग को मिलता है आराम : मानव व्यवहार एवं संबद्ध संस्थान के मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग दिमाग पर लगातार दबाव बनाता है। लगातार स्क्रीन देखने से ध्यान और स्मरण शक्ति प्रभावित हो सकती है।
कुछ समय के लिए डिजिटल ब्रेक लें तो मानसिक संतुलन बेहतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए कुछ छोटी आदतें अपनाई जा सकतीं हैं। खाने के समय फोन से दूरी, सोने से पहले स्क्रीन के इस्तेमाल में कमी और तय समय पर ही संदेश या सोशल मीडिया देखने से दिमाग को आराम मिलेगा और एकाग्रता में सुधार होगा।