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जेएनयू विवाद: नकाबपोशों के हमले से दहशत में छात्र, मानव श्रृंखला से दिखाई एकजुटता

Mon, 06 Jan 2020 08:22 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जेएनयू के विद्यार्थी - फोटो : Amar Ujala
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में रविवार को नकाबपोशों की भीड़ द्वारा साबरमती (संयुक्त), कोयना व पेरियार हॉस्टल में छात्र-छात्राओं को लाठी, डंडों से पीटनेे, शीशे तोड़ने की घटना से छात्र बेहद दहशत में हैं। हालांकि छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाकर हिम्मत व एकजुटता का संदेश दिया। कैंपस में सोमवार को दिनभर लेफ्ट और राइट की जुबानी जंग तथा आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे। उधर, एबीवीपी समर्थक छात्रों ने कैंपस छोड़ दिया। एबीवीपी का कहना है कि जब तक प्रशासन उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवाता वे अंदर नहीं जाएंगे। 

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जेएनयू कैंपस में वामपंथी छात्र संगठन अंदर तो एबीवीपी समर्थक छात्र गेट के बाहर ही रहे। दोनों छात्र गुट एक-दूसरे से डरने की बात कहते रहे। छात्रसंघ व शिक्षक संघ ने शाम को साबरमती टी प्वाइंट से मुख्य गेट तक शांति मार्च निकाला। इस दौरान करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क के दोनों ओर  मानव श्रृंखला बनाकर छात्र ने विरोधी ताकतों से लड़ने का संदेश भी दिया। इस दौरान वामपंथी छात्रों ने एबीवीपी शर्म करो, कुलपति इस्तीफा दो के नारे लगाए। 

वहीं, गेट के बाहर एबीवीपी समर्थक छात्रों ने कहा कि उन्होंने रात कैंपस के गेट पर गुजारी है। अंदर उनकी जान को खतरा है। वामपंथी छात्र संगठन उन्हें जान से मार देंगे। तीन दिन से वामपंथी छात्र संगठन उनके संगठन से जुड़े छात्रों से मारपीट कर रहे हैं। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन जब तक उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवाएगा, वे अंदर नहीं जाएंगे। 
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सूत्रों के अनुसार रविवार को नकाबपोश हमलावरों ने साबरमती हॉस्टल (लड़के और लड़कियों का एक साथ हॉस्टल) में एक घंटे में तीन बार हमला किया था। नकाबपोश हमलावरों का निशाना गर्ल हॉस्टल नहीं, बल्कि ब्यॉयज हॉस्टल था। पहली हमला रविवार शाम 6.50 से 7 बजे के करीब हुआ। इसके बाद नकाबपोश सवा सात बजे के बाद हॉस्टल से बाहर निकले और साढ़े सात से पौने आठ बजे के बीच दो बार दोबारा आए। इसके अलावा कोयना व पेरियार हॉस्टल के मुख्य गेट पर तोड़फोड़ करके आए थे। छात्र आम सभा में भाग लेने पहुंचे हुए थे, इसलिए कोयना व पेरियार गर्ल्स हॉस्टल में किसी को चोट नहीं आई।  

'साबरमती में ब्यॉयज हॉस्टल में एक घंटे में तीन बार हमला'

साबरमती ब्यॉयज हॉस्टल में रहने वाले एमए पास्तु के छात्र व नकाबपोश हमले के चश्मदीद मिर्जा रहमान का कहना है कि तीन बार हमला हुआ था। मिर्जा के मुताबिक शाम सात बजे के करीब वह तीन छात्र नमाज की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच वह पानी लेने बाहर आया तो सामने से एक छात्र भागकर और बोला भागो-भागो।

हम लोगों ने फटाफट कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और बेड व टेबल को दरवाजे से अड़ा दिया। बाहर से आवाज आयी कि यही है मिर्जा का रूम। तोड़ो-तोड़ो, वे करीब पांच मिनट तक दरवाजा पीटते रहे, लेकिन दरवाजा नहीं तोड़ पाए। दरवाजे के ऊपर शीशे टूट गए थे और अंदर पत्थर व ईंट मारी। हालांकि दरवाजा नहीं टूट पाया। इसके बाद वे चले गए। फिर थोड़ी देर बाद भीड़ दोबारा आयी और दरवाजे पर लात मारी। अचानक आवाज आयी कि छोड़ो अब चलते हैं। 

'अंबेडकर की फोटो के चलते मुझे भी निशाना बनाया'
देवरिया के रहने वाले एमफिल संस्कृत के दिव्यांग (नेत्रहीन) छात्र सूर्यप्रकाश साबरमती हॉस्टल में मिर्जा के साथ वाले कमरे में रहते हैं। सूर्यप्रकाश का कहना है कि उसके कमरे के बाहर बाबा साहिब अंबेडकर की फोटो लगी हुई थी। इस कारण नकाबपोश हमलावरों ने उसे भी निशाना बनाया जबकि वह किसी छात्र संगठन से जुड़ा हुआ नहीं हूं। वह अपने कमरे में बैठा था कि अचानक दरवाजा तोड़ा गया। इस बीच दरवाजे के ऊपर लगा शीशा भी टूटा और कांच से उसके सिर में चोट लगी। 
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'नकाबपोश भीड़ को देखकर जान बचाने साबरमती हॉस्टल में जान बचाने भागी'

सेंटर फॉर पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी की छात्रा श्रेया शिप्रा हॉस्टल में रहती है। रविवार को साबरमती टी प्वाइंट में जेएनयू शिक्षक संघ की आम सभा में भाग लेने पहुंची थी। सभा समाप्त होने पर डिनर के लिए अपने हॉस्टल जा रही थी कि अचानक नकाबपोश हमलावरों की भीड़ को देखकर साबरमती हॉस्टल में जान बचाने पहुंच गई। श्रेया के मुताबिक, 50-60 नकाबपोश युवकों की भीड़ हाथों में लाठी, डंडे लेकर आ रही थी। इस दौरान वह जान बचाकर गर्ल्स हॉस्टल में छिप गयी। भीड़ ने ब्यॉयज हॉस्टल में जाकर शीशे व दरवाजे तोड़े, गालियां दीं। पंद्रह-बीस मिनट बाद भीड़ दूसरे हॉस्टल की ओर चली गई। 
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