साबरमती ब्यॉयज हॉस्टल में रहने वाले एमए पास्तु के छात्र व नकाबपोश हमले के चश्मदीद मिर्जा रहमान का कहना है कि तीन बार हमला हुआ था। मिर्जा के मुताबिक शाम सात बजे के करीब वह तीन छात्र नमाज की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच वह पानी लेने बाहर आया तो सामने से एक छात्र भागकर और बोला भागो-भागो।
हम लोगों ने फटाफट कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और बेड व टेबल को दरवाजे से अड़ा दिया। बाहर से आवाज आयी कि यही है मिर्जा का रूम। तोड़ो-तोड़ो, वे करीब पांच मिनट तक दरवाजा पीटते रहे, लेकिन दरवाजा नहीं तोड़ पाए। दरवाजे के ऊपर शीशे टूट गए थे और अंदर पत्थर व ईंट मारी। हालांकि दरवाजा नहीं टूट पाया। इसके बाद वे चले गए। फिर थोड़ी देर बाद भीड़ दोबारा आयी और दरवाजे पर लात मारी। अचानक आवाज आयी कि छोड़ो अब चलते हैं।
'अंबेडकर की फोटो के चलते मुझे भी निशाना बनाया'
देवरिया के रहने वाले एमफिल संस्कृत के दिव्यांग (नेत्रहीन) छात्र सूर्यप्रकाश साबरमती हॉस्टल में मिर्जा के साथ वाले कमरे में रहते हैं। सूर्यप्रकाश का कहना है कि उसके कमरे के बाहर बाबा साहिब अंबेडकर की फोटो लगी हुई थी। इस कारण नकाबपोश हमलावरों ने उसे भी निशाना बनाया जबकि वह किसी छात्र संगठन से जुड़ा हुआ नहीं हूं। वह अपने कमरे में बैठा था कि अचानक दरवाजा तोड़ा गया। इस बीच दरवाजे के ऊपर लगा शीशा भी टूटा और कांच से उसके सिर में चोट लगी।
सेंटर फॉर पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी की छात्रा श्रेया शिप्रा हॉस्टल में रहती है। रविवार को साबरमती टी प्वाइंट में जेएनयू शिक्षक संघ की आम सभा में भाग लेने पहुंची थी। सभा समाप्त होने पर डिनर के लिए अपने हॉस्टल जा रही थी कि अचानक नकाबपोश हमलावरों की भीड़ को देखकर साबरमती हॉस्टल में जान बचाने पहुंच गई। श्रेया के मुताबिक, 50-60 नकाबपोश युवकों की भीड़ हाथों में लाठी, डंडे लेकर आ रही थी। इस दौरान वह जान बचाकर गर्ल्स हॉस्टल में छिप गयी। भीड़ ने ब्यॉयज हॉस्टल में जाकर शीशे व दरवाजे तोड़े, गालियां दीं। पंद्रह-बीस मिनट बाद भीड़ दूसरे हॉस्टल की ओर चली गई।