फैज अहमद फैज की नज्म 'हम देखेंगे' एक बार फिर चर्चा में है। जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को हुई हिंसा के विरोध में सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया और यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर एकत्र होकर फैज अहमद फैज की नज्म 'हम देखेंगे' गाया। छात्रों ने इस गीत के साथ ही 'हम होंगे कामयाब' गीत गाया और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए। छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ही नहीं, पूरे देश को दमनकारी सत्ता से मुक्ति मिलनी चाहिए और इसके लिए उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
इसके पहले यह नज्म कानुपर आईआईटी के छात्रों के द्वारा गाए जाने के बाद सुर्खियों में आई थी। उसके बाद से यह नज्म जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों के द्वारा गाई जा चुकी है। छात्रों ने इसे केंद्र सरकार के विरोध का प्रतीक बना लिया है।
नागरिकता कानून के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी
जेएनयू में अक्टूबर माह में फीसवृद्दि के मुद्दे से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब केवल यूनिवर्सिटी तक ही सीमित नहीं रह गया है। इन विरोध प्रदर्शनों में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अनेक कानूनों का विरोध भी हो रहा है। सोमवार को भी छात्रों ने नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में नारेबाजी की और कहा कि वे नागरिकता के लिए मांगे जाने पर कोई दस्तावेज जमा नहीं करेंगे। छात्रों के मुताबिक सरकार इन कानूनों के जरिए भारतीयों को भारत में ही विदेशी साबित करने की सोच से काम कर रही है।