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जेएनयू में भी छात्रों ने गाई फैज की नज्म 'हम देखेंगे', विरोध का प्रतीक बन गई ये कविता

Mon, 06 Jan 2020 07:41 PM IST
अवधेश कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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फैज अहमद फैज की नज्म 'हम देखेंगे' एक बार फिर चर्चा में है। जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को हुई हिंसा के विरोध में सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया और यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर एकत्र होकर फैज अहमद फैज की नज्म 'हम देखेंगे' गाया। छात्रों ने इस गीत के साथ ही 'हम होंगे कामयाब' गीत गाया और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए। छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ही नहीं, पूरे देश को दमनकारी सत्ता से मुक्ति मिलनी चाहिए और इसके लिए उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
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इसके पहले यह नज्म कानुपर आईआईटी के छात्रों के द्वारा गाए जाने के बाद सुर्खियों में आई थी। उसके बाद से यह नज्म जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों के द्वारा गाई जा चुकी है। छात्रों ने इसे केंद्र सरकार के विरोध का प्रतीक बना लिया है।  
 
नागरिकता कानून के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी

जेएनयू में अक्टूबर माह में फीसवृद्दि के मुद्दे से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब केवल यूनिवर्सिटी तक ही सीमित नहीं रह गया है। इन विरोध प्रदर्शनों में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अनेक कानूनों का विरोध भी हो रहा है। सोमवार को भी छात्रों ने नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में नारेबाजी की और कहा कि वे नागरिकता के लिए मांगे जाने पर कोई दस्तावेज जमा नहीं करेंगे। छात्रों के मुताबिक सरकार इन कानूनों के जरिए भारतीयों को भारत में ही विदेशी साबित करने की सोच से काम कर रही है।
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एल्यूमनी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में जेएनयू के छात्र ही शामिल नहीं हैं। बल्कि उनका साथ देने के लिए पूर्व में जेएनयू में शिक्षा प्राप्त कर चुके छात्र भी शामिल हैं। एक एल्यूमनी आसिमा सेन ने कहा कि यह लड़ाई केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश की स्वतंत्र विचारधारा पर केंद्र सरकार द्वारा लगाई जा रही दमनकारी नीतियों के खिलाफ में है। यही कारण है कि वे अपना काम छोड़कर यहां छात्रों का समर्थन करने आई हैं।

जामिया-अंबेडकर यूनिवर्सिटी के छात्र भी

जेएनयू में हो रहे प्रदर्शन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अंबेडकर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी भाग लिया। थर्ड जेंडर की अंबेडकर यूनिवर्सिटी की छात्र मीरा सिंघानिया ने कहा कि यह विरोध केवल फीसवृद्धि तक ही सीमित नहीं है। बल्कि वे इसके जरिए हर उस सोच का विरोध कर रही हैं जो समाज के एक वर्ग को दूसरे से अलग करने की सोच से काम करती है। 

उन्होंने कहा कि समाज में लोगों को धर्म, जाति और लिंग के आधार पर बांटा जा रहा है। यह भेदभाव वाली सोच एक दिन एक ही परिवार के लोगों को भी अलग-अलग बांटने का काम करने लगती है। सबको साथ रखने के लिए सबका सम्मान करने की सोच को आगे बढ़ाना होगा।
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