जेवर-सिकंद्राबाद हाइवे पर बीरमपुर गांव के पास ट्रैक्टर-ट्राली से कुचलकर दसवीं के छात्र की मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-ट्राली का पीसीआर से पीछा करने के दौरान पुलिसकर्मियों की लापरवाही से हादसा होने का आरोप लगाकर हाइवे जाम कर दिया।
जाम खुलवाने के लिए मौके पर रबूपुरा, जेवर व जहांगीरपुर तीन थानों की पुलिस पहुंच गई, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इसके बाद एसडीएम जेवर प्रसून द्विवेदी द्वारा पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री कोष से आर्थिक सहायता दिलाने और जांच में आरोप सही पाने पर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का आश्वासन देने पर तीन घंटे बाद जाम खुला।
रबूपुरा कोतवाली क्षेत्र के बीरमपुर गांव निवासी अजब सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। उनका बेटा अरुण (16) बृहस्पतिवार सुबह करीब 8 बजे गांव के बाहर जेवर-सिकंद्राबाद हाइवे पर बाइक साइड में खड़ी करके किसी का इंतजार कर रहा था। आरोप है कि इसी दौरान जेवर मार्ग की ओर से एक रोड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्राली निकली जिसका पीछा पीसीआर-2 में सवार पुलिसकर्मी कर रहे थे।
इसी दौरान हादसे में छात्र की मौत हो गई। छात्र की मौत की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और उन्होंने हाइवे पर जाम लगाकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। जाम के दौरान हाइवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
एसडीएम जेवर और सीओ जेवर का कहना है कि ट्रैक्टर-ट्राली से कुचलकर छात्र की मौत हुई है। मामले की जांच की जा रही है, अगर पीसीआर सवार पुलिसकर्मियों का दोष पाया जाता है तो उन पर कार्रवाई होगी।
चार बहनें किसे बांधेंगी राखी
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पुलिस पर वसूली के लिए पीछा करने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीसीआर से कुचलकर छात्र की मौत हुई है। जबकि पुलिस व अधिकारियों का कहना है कि छात्र की मौत ट्रैक्टर-ट्राली से कुचलकर हुई है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अगर पीसीआर पीछे थी तब भी पुलिसकर्मियों का ही दोष है। वह ट्रैक्टर सवारों से वसूली के लिए पीछा कर रहे थे और पुलिस को देखकर चालक ने बौखलाहट में नियंत्रण खो दिया। फिलहाल, पुलिस ने ट्रैक्टर चालक को हिरासत में लेकर जांच शुरू की है।
हादसे के बाद भी नहीं ली अरुण की सुध
ग्रामीणों ने बताया कि अरुण गंभीर रूप से घायल हो गया था। हादसे के बाद चालक ने भी ट्रैक्टर रोक लिया, लेकिन पीसीआर में सवार पुलिसकर्मियों ने पहले छात्र की सुध लेने की जगह आरोपी चालक को पकड़ा और थाने ले गई। पुलिसकर्मियों ने छात्र को अस्पताल ले जाने का प्रयास भी नहीं किया। ग्रामीण बाद ही उसे जेवर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
चार बहनें किसे बांधेंगी राखी
जाम के दौरान महिलाएं विलाप कर रहीं थीं। उनका कहना था कि अरुण चार बहनों का इकलौता भाई था। काजल, तनकलता, गौरी और लवली उसकी चार बहनें हैं। अरुण की मां राजबाला का कहना था कि दो सप्ताह बाद रक्षाबंधन हैं, चारों बहन अब किसे राखी बांधेगी।