केंद्र सरकार की एजेंसी के मुताबिक दिल्ली में पराली जलाने से केवल 6 प्रतिशत प्रदूषण (पीएम 2.5) होता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वायु गुणवत्ता मॉनिटर- सफर के अनुसार बुधवार को पराली जलाने से केवल 1 प्रतिशत जबकि रविवार, सोमवार और मंगलवार को 3 प्रतिशत प्रदूषण था।
दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार को धुएं की परत नजर आई और साथ ही हवा की गुणवत्ता भी बहुत खराब स्तर पर पहुंच गई। जबकि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत बिजली जनरेटरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया है। हवा के हल्के बहाव के चलते शुक्रवार को भी वायु गुणवत्ता स्तर में किसी सुधार की संभावना नहीं है।
सफर के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में गुरुवार को पराली जलाने से 6 प्रतिशत प्रदूषण (पीएम 2.5) हुआ। बुधवार को हरियाणा, पंजाब और पड़ोसी राज्यों मे पराली जलाने की घटनाओं में तेजी दिखी। एजेंसी के अनुसार हवा की दिशा खेत की आग का धुआं दिल्ली में लाने के अनुकूल है। जिससे आने वाले दिनों में दिल्ली में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने की उम्मीद है।
नासा की उपग्रह इमेजरी में पंजाब के अमृतसर, पटियाला, तरनतारन और फिरोजपुर के पास और हरियाण के अंबाला और राजपुरा में खेतों में आग दिखाई दी।
इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली के प्रदूषण 96 फीसदी स्थानीय कारकों से और मात्र चार फीसदी पराली के कारण है। जावडेकर ने दिल्ली समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण नियंत्रण के लिए गठित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दस्तों को अपने आवास से रवाना करने से पहले यह बात कही थी।
इसके साथ ही उन्होंने बताया था कि सीपीसीबी की 50 टीमें अब हर रोज फील्ड में रहेंगी। दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर रहती है जिसका मुख्य कारण लोकल फैक्टर्स हैं ।
जावड़ेकर की इस टिप्पणी पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया भी आई। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया कि बार-बार इनकार करने से कुछ नहीं होगा। अगर पराली जलने से केवल चार फीसदी प्रदूषण होता है, तो प्रदूषण में अचानक रात में ही यह वृद्धि क्यों हुई है? उससे पहले हवा साफ थी। एक ही कहानी हर साल। कुछ ही दिनों में दिल्ली में प्रदूषण को लेकर ऐसा कोई उछाल नहीं हुआ है?