हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो कर्मचारियों की हड़ताल पर अगली आदेश तक रोक बढ़ा दिया है। कर्मचारियों ने वेतन वृद्घि समेत कई मांगों को लेकर 30 जून को हड़ताल की घोषणा की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 29 जून की रात को ही इस मामले में आदेश जारी किया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि मेट्रो दिल्ली एनसीआर में परिवहन व्यवस्था की जीवन रेखा है। इसके कर्मचारियों की हड़ताल से 25 लाख दैनिक यात्री प्रभावित होंगे। जस्टिस प्रतिभा रानी ने 29 जून के अंतरिम आदेश को बढ़ाते हुए मामले की सुनवाई के लिए चार सितंबर की तारीख तय की है। मेट्रो कर्मचारी परिषद ने नोटिस का जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अगली तारीख तय की गई।
हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मेट्रो कर्मचारी परिषद के कई पदाधिकारियों को नये सिरे से नोटिस जारी कर अगली तारीख तक जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने एएसजी संदीप सेठी से पूछा कि कर्मचारियों की 30 जून को होने वाली हड़ताल की तारीख बीतने के बाद क्या यह याचिका बेकार नहीं हो गई है। एएसजी सेठी ने कहा कि दिल्ली मेट्रो की याचिका अब भी बेकार नहीं हुई है क्योंकि कर्मचारियों ने तीन नोटिस देकर कहा है कि उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वह हड़ताल करने को बाध्य होंगे।
कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों की ओर से अधिवक्ता राजीव मिश्रा ने तर्क रखा कि दिल्ली मेट्रो को निर्देश दिया जाए कि वह हलफनामा देकर आश्वासन दे कि मेट्रो तथा कर्मचारियों के बीच 2017 में हुए समझौते को मानेगी। कोर्ट ने कहा कि यह बहस का मुद्दा है और इसका निर्णय बाद में किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ने याचिका दायर कर कर्मचारी परिषद की ओर से 14, 18 व 20 जून को दिए गए तीन नोटिसों को चुनौती देते हुए प्रस्तावित हड़ताल पर रोक लगाने का आग्रह किया था।