भूतल के साथ पांच मंजिल या उससे ऊंची और 3000 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाली इमारतों में एंटी-स्मॉग गन चलाना अनिवार्य
पर्यावरण मंत्री ने लुटियंस दिल्ली में जांचे इंतजाम, निर्माण स्थलों और मलबा प्रबंधन पर भी सख्ती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की निगरानी तेज कर दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को लुटियंस दिल्ली के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर ऊंची इमारतों में लगे एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम की स्थापना व संचालन की स्थिति जांची। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले भवनों, होटलों और निर्माण स्थलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने सरदार पटेल मार्ग से निरीक्षण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के निर्देशों के अनुसार निर्धारित श्रेणी की व्यावसायिक, संस्थागत और हॉस्पिटैलिटी इमारतों में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय करना अनिवार्य है। भूतल के साथ पांच मंजिल या उससे अधिक ऊंची तथा 3000 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम का उद्देश्य धूल के कणों को हवा में फैलने से रोकना है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन इमारतों में ये उपकरण नहीं लगे हैं या निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के पालन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
निर्माण स्थलों और मलबा प्रबंधन पर भी सख्ती
सरकार की निगरानी इमारतों तक सीमित नहीं रहेगी। निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान उड़ने वाली धूल तथा निर्माण एवं विध्वंस मलबे के उचित निस्तारण पर भी नजर रखी जाएगी। संबंधित एजेंसियों और प्रतिष्ठानों को निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एक नवंबर से वाहनों पर प्रतिबंध
मंत्री ने बताया कि एक नवंबर से बीएस-6 उत्सर्जन मानक से नीचे के वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर निर्धारित प्रतिबंध लागू होंगे। उन्होंने वाहन मालिकों से नियमों का पालन करने और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) रखने की अपील की।
एआई निगरानी के साथ 334 टीमें तैनात
सरकार के मुताबिक, एक अक्तूबर से एआई-सक्षम कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, 60 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र और 334 प्रवर्तन टीमें चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं। सरकार ने 2200 से अधिक प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को सील करने का भी दावा किया है। मंत्री ने कहा कि स्वच्छ हवा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों, निर्माण एजेंसियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सहयोग जरूरी है। सरकार का उद्देश्य अनावश्यक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है।