सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उनके उस बयान के लिए जमकर फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने सीलिंग पर नजर रखने के लिए शीर्ष अदालत की गठित कमेटी के सदस्यों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी। पुरी ने कहा था कि कमेटी के सदस्य वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं और उन्हें वास्तविक हालात की कोई समझ नहीं है। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से कहा कि कृपया उनसे (पुरी से) ही पूछकर बताइए कि हमें बुद्धिमानी कहां से मिलेगी।
पुरी के इस बयान को लेकर जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने उनसे सवाल किया कि क्या हमें समझ नहीं है? पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली में अवैध निर्माणों की सीलिंग से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। दोनों जजों ने अप्रैल में आई मीडिया रिपोर्ट पर नाराजगी जताई, जिसमें पुरी ने राष्ट्रीय राजधानी में चल रही सीलिंग की कार्रवाई में निगरानी कमेटी की भूमिका की आलोचना की थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि निगरानी कमेटी शीर्ष न्यायालय के निर्देशों पर काम कर रही है। पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से सवाल किया, क्या हम नहीं जानते कि कैसे काम होता है? कृपया उनसे पूछकर बताइए कि क्या हमें बाजार से बुद्धिमानी मिल सकती है? वह बताएं तो हम भी कुछ समझदारी हासिल कर लें।
बड़े नाम हैं निगरानी कमेटी में शामिल
बता दें कि शीर्ष न्यायालय की तरफ से 24 मार्च, 2006 को सीलिंग पर निगरानी के लिए गठित की गई कमेटी में अपने क्षेत्र के कई बड़े नाम शामिल हैं। कमेटी में मुख्य चुनाव आयुक्त के पूर्व सलाहकार केजे राव, पर्यावरण प्रदूषण (निरोधक व नियंत्रक) प्राधिकरण के चेयरमैन भूरे लाल और सेवानिवृत्त मेजर जनरल सोम झिंगन जैसे लोग शामिल हैं।
डीडीए वाइस चेयरमैन व एसडीएमसी के डिप्टी कमिश्नर को किया तलब
सीलिंग मामले में शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वाइस चेयरमैन और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के डिप्टी कमिश्नर को 18 जुलाई को उपस्थित होने के लिए कहा। इन दोनों अधिकारियों से नगर में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ये स्पष्टीकरण शीर्ष न्यायालय की निगरानी कमेटी की तरफ से जमा की गई रिपोर्ट के आधार पर मांगा गया है, जिसमें दावा किया गया है कि अधिकारी मास्टर प्लान-2021 में संशोधन नहीं होने के आधार पर अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।