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इस लड़की ने खोली बॉलीवुड की शर्मनाक सच्चाई

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क्या आप सोच सकते हैं कि जिस बॉलीवुड को हम इतना पेशेवर और मॉडर्न समझते हैं वहां खुलआम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा है और आज तक किसी ने उसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई?
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बात उस दिन की है जब दिल्ली के लाजपत नगर में रहने वाली चारू खुराना अपनी मां के साथ कहीं जा रही थी। रास्ते में उनकी मां ने उन्हें अपना वैनिटी बॉक्स थामने के लिए बोला।

चारू ने यूं ही उस बॉक्स को खोला और अंदर की दुनिया ने उन्हें रोमांचित कर दिया। उस वैनिटी बॉक्स में दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों के कॉस्मैटिक यानि प्रसाधन के सामान थे।
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वैनिटी बॉक्स की ताकत ने चौंकाया

उस वक्त चारू कॉलेज में पढ़ती थी। घर पहुंचने पर चारू ने खुद पर इन प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया। असल में मेकअप के बाद उनका चेहरा कुछ अलग ही दिख रहा था।

उस दिन चारू को समझ में आया कि इस वैनिटी बॉक्स में कितनी ताकत है। असल में चारू की मां मेकअप आर्टिस्ट थीं लेकिन बहुत पहले ही उन्होंने इस पेशे को छोड़ दिया था।

मेकअप की इस ताकत ने चारू को भी अपनी मां की ही तरह इस पेशे का दीवाना बना दिया। एमबीए करने के बाद उन्होंने दिल्ली में ही मेकअप करने की ट्रेनिंग ली। लेकिन चारू का सपना अपनी मां की तरह दुल्हनों को सजाने और इसी तरह के अवसरों पर काम करने तक सीमित नहीं था।

सबके सामने जलील किया गया

चारू ने तय किया कि अपनी इस कला के साथ वह नया प्रयोग करेंगी और दुनिया का भ्रमण भी करेंगी। चारू जानती थी कि अगर उन्हें बॉलीवुड में काम मिल गया तो वह अपने सारे सपने पूरा कर सकती हैं।

चारू ने लॉस एंजलिस के मेकअप स्कूल से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया और 2009 में मुंबई पहुंच गईं। उन्होंने महीनों कोशिश की लेकिन उन्हें सिने कॉस्ट्यूम मेकअप आर्टिस्ट एंड हेयर ड्रेसरर्स एसोसिएशन (CCMAA) की सदस्यता नहीं मिली।

बात यहीं नहीं खतम हुई। 2009 में जब एक बॉलीवुड फिल्म वेडनेसडे के तमिल वर्जन में काम करने वाले कलाकारों के लिए मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं तभी यूनियन ने वहां रेड डाली और चारू को बेहद जलील किया और उनपर 25000 का जुर्माना भी लगा दिया।

यूनियन का कहना था कि इस काम को लड़कियां नहीं कर सकतीं। इसे केवल पुरूष ही कर सकते हैं। चारू ने मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम करके यूनियन की इस परंपरा का उल्लंघन किया है।
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पांच साल बाद मिला न्याय

इस बार चारू ने तय किया कि यूनियन के इस रवैये के खिलाफ अदालत जाएंगी। आखिर पांच साल बाद सोमवार को उनकी यह लड़ाई पूरी हुई और सुप्रीम कोर्ट ने सीसीएमएए को महिलाओं के मेकअप आर्टिस्ट बनने पर लगी इस रोक को भारतीय संविधान के खिलाफ बताते हुए इसमें बदलाव का आदेश दिया।

इस लंबी लड़ाई ने चारू के जीवन के कई साल यूं ही बर्बाद कर दिए। अब उनका 18 साल का एक बेटा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चारू को इस बात का डर है कि आखिर कोर्ट के आदेश के बाद भी इस बात की क्या गारंटी है कि उन्हें न्याय मिलेगा ही।

साभार: इंडियन एक्सप्रेस
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