भारत में मां को मां-लक्ष्मी (समृद्घि की देवी) के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं रामायण व महाभारत में भी मां को जननी व अपने बच्चों की रक्षा करने वाली बताया गया बावजूद इसके लोग अपनी मां के प्रति नकारात्मक रवैये अपना रहे है। हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए 92 वर्षीय बुजुर्ग को राहत प्रदान करते हुए उसका घर दिलवा दिया। मकान पर पुत्र ने कब्जा जमा रखा था।
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने अपने फैसले में पुत्र के उस तर्क को खारिज कर दिया कि याचिका तय अवधि से देरी से दायर की गई है। ऐसे में याचिका विचारयोग्य नहीं है। अदालत ने कहा कि सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि याची कौशल देवी रीलैन जंगपुरा स्थित संपत्ति की तीसरी मंजिल की मालकिन है।
अदालत ने पुत्र के तर्को को खारिज करते हुए कौशल देवी को उक्त मकान की तीसरी मंजिल की मालकिन करार देते हुए उसे कब्जा देने का निर्देश दिया है। दरअसल इस संपत्ति को लेकर काफी अरसे से विवाद चल रहा है।
कौशल देवी ने अदालत को बताया कि उसकी हार्ट सर्जरी हुई है और वह बिस्तर पर है। उसने संपत्ति पर दावा करते हुए कहा कि अपना मकान होने के बावजूद वह किराए के मकान में रहने के लिए मजबूर है। याची ने कहा कि पति की मौत के बाद उसका कोई भी आय का कोई साधन नहीं है। इस कारण चिकित्सा, दवा व घर खर्च के लिए भी परेशानी झेल रही है।
कौशल देवी ने कहा कि उसके बेटे के पास तीसरी मंजिल पर तीन बैडरूम का सैट है और उसने उससे रहने के लिए मात्र एक कमरा मांगा लेकिन उसने देने से इनकार कर दिया। कौशल देवी ने अदालत से मकान का कब्जा दिलवाने का आग्रह करते हुए कहा कि उसकी अंतिम इच्छा है कि उसके प्राण अपने ही घर में निकले।
वहीं कौशल देवी के बेटे ने कहा कि तीन सदस्यों का परिवार इस मकान में रह रहा है और उसके पास अतिरिक्त स्थान नहीं है।