गैंगस्टर काला खैरमपुरिया गिरफ्तार
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एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) गुरुग्राम टीम ने कुख्यात गैंगस्टर राकेश उर्फ काला खैरमपुरिया को थाईलैंड से भारत आने पर गिरफ्तार किया है। काला खैरमपुरिया पर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में 20 से ज्यादा हत्या, हत्या के प्रयास से संबंधित मामले दर्ज हैं। खैरमपुरिया पर भाऊ गैंग के गुर्गों के जरिए हिसार में महेंद्रा शोरूम के मालिक एवं इनेलो नेता से 5 करोड़ की रंगदारी मांगने, दिल्ली में बर्गर किंग के सामने गोली मारकर हत्या व दो अन्य व्यापारियों से दो-दो करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप है। एसटीएफ हिसार की टीम ने छह दिन की रिमांड पर लिया है।
एसटीएफ के डीआईजी सिमरदीप सिंह ने बताया कि काला खैरमपुरिया पर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में 20 से ज्यादा हत्या, हत्या के प्रयास से संबंधित मामले दर्ज हैं। वह आठ साल से देश से बाहर था। उसकी लास्ट लोकेशन पुर्तगाल बताई जा रही थी। वहां से बैठकर हरियाणा में अपराध को अंजाम दे रहा था। काला खैरमपुरिया 2020 में पैरोल पर छूटने के बाद से कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बच रहा था। उसने शुरुआत में भारत के भीतर से और संयुक्त अरब अमीरात, आर्मेनिया जैसे देशों से विदेश भागने के बाद थाईलैंड से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देना जारी रखा।
स्पेशल टास्क फोर्स के अधिकारियों ने तुरंत गृह मंत्रालय के साथ समन्वय किया और काला के खिलाफ संबंधित इंटरपोल संदर्भ और नोटिस भी जारी कराए। गृह मंत्रालय ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और भारत और विदेश दोनों में विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय किया। गृह मंत्रालय ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और भारत और विदेश दोनों में विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय किया। इस बीच, एसटीएफ की टीमों ने उसका पासपोर्ट भी रद्द करा लिया, जो उसने फर्जी तरीके से हासिल किया था। गृह मंत्रालय व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयास के चलते राकेश उर्फ काला को निर्वासित किया गया और फिर उसे एसटीएफ टीमों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।
2014 में अपराध की दुनिया में रखा कदम
राकेश का आपराधिक रिकॉर्ड 2014 में शुरू हुआ। उसे डकैती, हत्या और आग्नेयास्त्रों के अवैध कब्जे के मामलों में दोषी ठहराया गया। वहीं 2015 में पुलिस स्टेशन भादरा में की गई एक हत्या मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 2020 तक सजा काटने के बाद पैरोल पर रिहा कर दिया गया। वह गिरफ्तारी से बचता रहा। हरियाणा और पड़ोसी राज्यों में क्राइम की वारदातों को अंजाम देता रहा। वर्ष 2021 में उसने दूसरी हत्या थाना भट्टृकलां के गांव दरौली में की। जिसमें उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी और उसे 2023 में पीओ घोषित कर दिया गया। इसके बाद धोखाधड़ी से हासिल किए गए पासपोर्ट के जरिए वह विदेश भाग गया और वहीं से सिंडिकेट चलाने लगा। उसके सिंडिकेट में हिमांशु भाऊ गैंग और नीरज फरीदपुरिया गैंग शामिल था।