डिजिटल युग में भी कायम संस्कारों की साख,
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। विजयदशमी के पावन अवसर पर पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज तीन स्थित मंदिर में विद्यारम्भम अनुष्ठान आयोजित किया गया। इस दौरान हजारों बच्चों ने डिजिटल माध्यमों से अलग पीतल की थाली में रखे अक्षत (चावल) पर अपना पहला अक्षर उकेरा। यह सनातन परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाता है।
यह अनुष्ठान दक्षिण भारत से लेकर राजधानी दिल्ली तक हुआ। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते प्रभाव के बावजूद अभिभावक बच्चों की शुरुआती शिक्षा में सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं। अनुष्ठान के दौरान विद्वान गुरुओं और माता-पिता ने बच्चों की तर्जनी उंगली पकड़कर चावल से भरी थाली पर हरिश्री गणेशाय नम: लिखवाकर पढ़ाई का श्रीगणेश कराया। जानकारों के अनुसार, चावल पर अक्षर उकेरने से बच्चों की एकाग्रता और स्पर्श क्षमता का विकास होता है।
विद्यारम्भम अनुष्ठान और वाणी की मधुरता
यह अनुष्ठान बच्चों को पारंपरिक तरीके से ज्ञान की दुनिया में प्रवेश कराता है। यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रभाव के बीच सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में सहायक है। परंपरा के अनुसार, अक्षर-अभ्यास के बाद बच्चों की जीभ पर सोने की अंगूठी से पवित्र शब्द लिखे गए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोने से जीभ पर अक्षर लिखने से बच्चे की वाणी में मधुरता, स्पष्टता और प्रखरता आती है।