स्कूल प्रबंधन ने घटना के बाद कैंटीन से नमूने लेने पहुंची खाद्य विभाग की टीम को भी करीब दो घंटे तक प्रवेश नहीं करने दिया था। इस दौरान स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को परोसा गया खाना समेत पूरी कैंटीन साफ करा दी थी।
कैंटीन साफ होने की वजह से खाद्य विभाग की टीम को मौके से केवल तेल और अजवाइन के ही नमूने मिले थे, जिसे जांच के लिए भेजा गया।
आठ लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है पुलिस
अब तक आठ लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इसमें से दो स्कूल के छात्र हैं, जो विषाक्त भोजन करने से बीमार हुए थे। इसके अलावा स्कूल की कैंटीन के संचालक महेंद्र, स्कूल प्रबंधक पूर्व कर्नल डीके फ्रशवाल और चार अभिभावकों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
मामले में लगभग 100 लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस द्वारा नोटिस जारी किया जा चुका है। इसमें 62 बीमार बच्चे व उनके अभिभावक, स्कूल प्रबंधन के लोग और अस्पताल में बीमार बच्चों का इलाज करने वाले चिकित्सकों की टीम शामिल है।
स्कूल में बीमार होने वाले बच्चों के हाईप्रोफाइल अभिभावकों ने स्कूल से डरकर न तो पुलिस से शिकायत की और न ही अब जांच में सहयोग कर रहे हैं।
कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके बच्चे के बीमार होने की जानकारी मांगने पर उल्टा पुलिस को ही धमका दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुलिस से कहा कि जब उन्होंने कोई शिकायत ही नहीं की तो वह किसके आदेश पर उनसे पूछताछ करने आए हैं।
उनका कहना है कि स्कूल बहुत अच्छा है और उन्हें कोई शिकायत नहीं करनी। एक अन्य अभिभावक व वरिष्ठ अधिकारी ने पुलिस से कहा कि उनका बच्चा स्कूल से एकदम सही आया था। वह घर आने के बाद बीमार हुआ था। इसमें स्कूल की कोई गलती नहीं है।
कैंटीन संचालक ने सुपरवाइजर को बताया जिम्मेदार
पुलिस के अनुसार कैंटीन संचालक महेंद्र ने बयान में बताया है कि घटना के वक्त वह घर पर था। कैंटीन में सुपरवाइजर की देखरेख में कर्मचारी काम करते हैं।
कैंटीन के रखरखाव व साफ-सफाई के लिए सुपरवाइजर ही जिम्मेदार होता है। वह खुद भी मामले में जांच कर रहे हैं कि कैसे और किससे गलती हुई थी। महेंद्र नोएडा में ही कई बड़े संस्थानों में कैंटीन का संचालन करते हैं।