हाईकोर्ट ने सुरक्षित घर में रहने की सुविधा न प्रदान करने के बाद दिया निर्देशसंवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने एक अंतर-धार्मिक जोड़े को राहत प्रदान की है। न्यायालय ने यह फैसला दिल्ली पुलिस की तरफ से जोड़े को सुरक्षित घर में रहने की सुविधा न प्रदान करने के बाद दिया है। आरोप है कि कथित रूप से जोड़े को जबरन अलग कर दिया व महिला को आश्रय गृह में हिरासत में रखा गया। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने उस युवक की दलील दर्ज की, जिसने दावा किया कि महिला की ओर से उसके साथ रहने की बार-बार अपील के बावजूद दिल्ली पुलिस ने उक्त कार्रवाई की। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार का आचरण प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता और महिला दोनों के विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त स्वतंत्रता, सम्मान और विवाह के संबंध में स्वायत्त निर्णय लेने के उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित डीसीपी को निर्देश दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से सत्यापित एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें, जिसमें शिकायत पर की गई कार्रवाई सहित 23-24 जुलाई की घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों का विवरण हो। अदालत ने डीसीपी को मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करने, आश्रय गृह में महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसकी इच्छाओं को दर्ज करने का भी निर्देश दिया है।
मामले में मुस्लिम युवक ने अपनी और हिंदू महिला की सुरक्षा के लिए याचिका दायर की है। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। पारिवारिक विरोध के कारण दोनों को सुरक्षा को लेकर आशंका थी। यह प्रस्तुत किया गया कि युगल 2018 से सहमति से रिश्ते में थे और विशेष विवाह अधिनियम के तहत अपनी शादी को संपन्न कराना चाहते थे।