देश की राजधानी से सटा यूपी का पहला और ए श्रेणी स्टेशन होने के बाद भी गाजियाबाद के पुराने रेलवे स्टेशन ने उपेक्षा ही झेली है। प्रतिदिन करीब दो सौ यात्री ट्रेनें और 75 से ज्यादा मालगाड़ियां इसी स्टेशन से होकर गुजरती है।
पौने दो लाख यात्री यहां से गाजियाबाद स्टेशन से सफर करते हैं। आमदनी में रेलवे की झोली भरने में भी गाजियाबाद स्टेशन पीछे नहीं है। बावजूद इसके गाजियाबाद स्टेशन बदहाल है। यात्रियों को सुविधाओं की दरकार है।
रेल बजट पेश होने वाला है, लिहाजा साल भर उपेक्षा झेलने वाले गाजियाबाद स्टेशन और यहां के यात्रियों को भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं।
स्टेशन का हाल और यात्रियों की उम्मीदें जानने के लिए सोमवार को ‘अमर उजाला’ उनके बीच पहुंचा तो यात्रियों ने कई समस्याएं गिना दीं।
स्टेशन पर कुछ घंटे हमने भी बिताए तो लगा कि यात्रियों की एक भी मांग गलत न थी। कई सालों से उपेक्षित यह स्टेशन रेल मंत्री से सुविधाओं की बाट जोह रहा है। उम्मीद है कि इस बार वादे पूरे हों।
काउंटर की कमी, टिकट लेने के चक्कर में छूट जाती हैं ट्रेनें
गाजियाबाद स्टेशन पर सुविधाओं का पहिया उल्टा घूम रहा है। करीब 10 साल पहले जब स्टेशन पर यात्रियों की संख्या कम रहती थी तो जनरल टिकट काउंटर 10 थे।
अब यात्रियों की संख्या बढ़ी तो कई काउंटर बंद रहने लगे। यात्रियों को टिकट लेने के लिए पहले घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है। अधिकांश लोगों की ट्रेनें टिकट लेने के चक्कर में ही छूट जाती है।..
दिव्यांगों और बीमारों का ट्रेन तक पहुंचना मुश्किल
गाजियाबाद स्टेशन पर दिव्यांगों और बीमारों को प्लेटफार्म तक पहुंचना हो तो फिर कई मुश्किलों से जूझना पड़ता है। लिफ्ट या एस्केलेटर न होने की वजह से पैदल चलने में अक्षम लोगों को उठाकर प्लेटफार्म तक ले जाना पड़ता है।
स्टेशन पर अक्षम लोगों के लिए व्हील चेयर तो है, लेकिन इन व्हील चेयर के प्लेटफार्म तक पहुंचने का रास्ता नहीं है।
पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं
प्रतिदिन पौने दो लाख यात्रियों के आवागमन वाले गाजियाबाद स्टेशन पर उनके लिए पीने के साफ पानी का इंतजाम भी नहीं है।
गिनती करने के लिए तो प्लेटफार्म पर वाटर पोस्ट बनाए गए हैं, लेकिन गंदगी इतनी है कि इन पर खड़े होकर पानी पीना बीमारी को ‘दावत’ देने जैसा है। लोग इन वाटर पोस्ट से पानी पीने की बजाय 20 रुपये की बोतल खरीदना ज्यादा बेहतर मानते हैं।