पहाड़ों पर चढ़ाई के दौरान शरीर में कई तरह की परेशानी होती है। सांस लेने में दिक्कत, रक्तचाप में उतार चढ़ाव सहित अन्य विकास शरीर को परेशान करते हैं। एम्स इस विषयों पर मरीज को इलाज दे रहा है। इस समझौते के बाद इन्हें अपग्रेड किया जाएगा। एम्स की मीडिया प्रमुख डॉ. रीमा दादा का कहना है कि आने वाले सप्ताह में यह समझौता हो सकता है। इस समझौते के बाद स्पेस मेडिसिन और हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन से जुड़े इलाज को अपग्रेड करने में मदद मिलेगी। साथ ही इस दिशा में शोध कर नवाचार को बढ़ावा दे सकेंगे।एम्स डीजीएएफएमएस के साथ साझेदारी करके अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देगा। जिसका फायदा एम्स में पढ़ने वाले छात्रों
को होगा।
एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास की अध्यक्षता में होने वाले समझौते को लागू करवाने के लिए एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत को नोडल अधिकारी बनाया। समझौते से शैक्षणिक और अनुसंधान के क्षेत्र में फायदा होगा, साथ ही चिकित्सा ज्ञान और अभ्यास की समग्र उन्नति भी होगी। समझौते के बाद एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास का कहना है कि इस समझौते के बाद हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन और स्पेस मेडिसिन में एम्स की क्षमताओं में निखार आएगा।
एम्स की स्टाफ कारों में लगाए जाएंगे जीपीएस
एम्स के संकाय, डॉक्टर व अन्य स्टाफ ऑफ ड्यूटी के समय भी मरीजों का उपचार कर सकेंगे। इन्हें परिवहन की सुविधा देने के लिए एम्स निदेशक एस श्रीनिवास ने सभी स्टाफ के कारों में जीपीएस उपकरण लगाने का आदेश दिया है। इसमें कहा गया है कि स्टाफ कारों का उपयोग अक्सर ऑफ-ड्यूटी और कभी-कभी देर रात के समय एम्स संकाय, डॉक्टर व कर्मचारियों को तत्काल लाने के लिए किया जाता है। ऐसे में रोगी देखभाल सुविधा को बेहतर करने के लिए परिवहन सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा।
ट्रेस होगी वाहन की खराबी
यदि कोई वाहन खराब भी हो जाती है तो जीपीएस की मदद से उसे ट्रेस कर दूसरी सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। जीपीएस से लैस स्टाफ कारों की आवाजाही की निगरानी केंद्रीय परिवहन में तैयार किए गए कंट्रोल रूम से वास्तविक समय के आधार पर की जाएगी। इसकी मदद से वाहनों की चलने की दूरी, ईधन सहित अन्य सभी की जांच होगी।