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सूरजकुंड मेला: थीम स्टेट झारखंड की कला संस्कृति दर्शाएंगे द्वार 

Sat, 14 Jan 2017 10:25 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद /अमर उजाला, फरीदाबाद
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सूरजकुंड - फोटो : अमर उजाला
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सूरजकुंड मेले में आने वाले दर्शक झारखंड राज्य की स्थापत्यकला, आध्यात्मिक जीवन और प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू होंगे । मेला परिसर के चार प्रवेश मार्गों पर झारखंड राज्य के प्रमुख तीर्थ और दर्शनीय स्थलों की प्रतिकृति गेट के रूप में दर्शकों का जोहार (स्वागत) करेंगी तो छोटी चौपाल पर राज्य की प्राकृतिक संपदा के दर्शन होंगे। 
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राज्य के इटखोरी ब्लॉक में स्थित भद्रकाली मंदिर हिंदू-जैन और बौद्ध तीनों ही धर्म के अनुयायियों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर के इटखोरी प्रवेशद्वार की प्रतिकृति मेले में दिखाई देगी।

राज्य का ही दूसरा प्रसिद्ध छिन्नमस्ता देवी मंदिर से दर्शकों को परिचित कराने के लिए इस मंदिर का राजरप्पा गेट तैयार किया जा रहा है। राज्य की प्राकृतिक संपदा बांस और जूट को भी मेले परिसर में गेट के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।
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मेहमानों का स्वागत जोहार से होगा

झारखंड पर्यटन विभाग द्वारा बनाया जा रहा ईंटखोरी गेट। - फोटो : अमर उजाला
​दिल्ली साइड के प्रवेश मार्ग पर बांस से तैयार किया गया गेट और उस पर लगे छऊ मुखौटे दर्शकों का मन लुभाएंगे। एक अन्य गेट बांस और जूट से तैयार किया जा रहा है।

इसमें छऊ मुखौटों के अलावा राज्य की सोहराई और जादोपटिया कलाकृतियां भी प्रदर्शित की जाएंगी। यह सभी गेट अस्थायी हैं जबकि मुख्य चौपाल के पास मलूती देवी मंदिर गेट बनाया जा रहा है।

राज्य में मेहमानों का स्वागत दोनों हाथ जोड़कर किया जाता है इसे ‘जोहार’ कहा जाता है। इन पांचों गेट पर झारखंड राज्य का यह वाक्य ‘जोहार’ आने वालों का स्वागत करेगा। मेला परिसर की सजावट का जिम्मा संभाल रही पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स की रीफत रसूल ने बताया कि झारखंड और हरियाणा राज्यों की रंगबिरंगी संस्कृतियों को दर्शाने के लिए मेला परिसर को नया रूप दिया जा रहा है। 
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छोटी चौपाल पर बिखरेगी प्राकृतिक छटा 

झारखंड पर्यटन विभाग द्वारा बनाया जा रहा बांस का द्वार। - फोटो : अमर उजाला
 झारखंड राज्य का प्राकृतिक सौंदर्य मेले की छोटी चौपाल पर शोकेस किया जाएगा। जिस तरह मुख्य चौपाल पर छऊ मुखौटा और ढोकरा मूर्तियां राज्य की कला और संस्कृति को प्रस्तुत करेंगी।

उसी तरह छोटी चौपाल को राजकीय वृक्ष साल के पत्तों और राजकीय फूल पलाश के रंग से सजाया जाएगा। सबई घास, बांस और जूट का उपयोग भी छोटी चौपाल को सजाने में किया जाएगा।

पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स की रीफत रसूल ने बताया कि छोटी चौपाल सरकार के पर्यावरण संरक्षण की थीम पर ईको फ्रेंडली बनाई जा रही है। 
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