स्कूल में लंगूर बांधने के मामले की गूंज शासन तक पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और सांसद वीके सिंह ने प्रदेश सरकार से एसएसपी और एसएचओ के व्यवहार की शिकायत की है।
मेनका गांधी ने शासन को लिखा है कि लंगूर मामले में एसएसपी को फोन किया, लेकिन एसएसपी ने उनसे फोन पर बात करना तक मुनासिब नहीं समझा। अपने पीआरओ को फोन ट्रांसफर कर दिया।
उनके एसएमएस का भी जवाब नहीं दिया। वीके सिंह ने मेनका गांधी के शिकायती पत्र का हवाला देते हुए सीएम अखिलेश यादव को लिखा है कि केंद्रीय मंत्री से इस तरह का व्यवहार एक जिम्मेदार पुलिस अफसर को शोभा नहीं देता।
शासन ने एसएसपी धर्मेंद्र सिंह और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के खिलाफ जांच के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में शासन ने आईजी मेरठ जोन आलोक शर्मा को पत्र लिखा है। आईजी ने डीआईजी के. सत्यनारायण को मामले की जांच सौंपी है।
शासनादेश के बाद आईजी मेरठ जोन ने डीआईजी मेरठ रेंज को भेजे गोपनीय पत्र में लिखा है कि मामला महत्वपूर्ण है। इसका खुद संज्ञान लेते हुए जांच कर आख्या अपनी सुस्पष्ट टिप्पणी के साथ उपलब्ध कराएं।
12 जुलाई को हुआ था थाने में हंगामा
12 जुलाई 2014 को पीएफए सदस्य रुचिन मेहरा संजयनगर के एक स्कूल में गए थे। वहां से उन्होंने स्कूल में बंधे लंगूर को मुक्त कराया था और उसे लेकर कविनगर थाने पहुंचे थे। थाने में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने को लेकर उनकी तत्कालीन एसएचओ अरुण कुमार से कहासुनी हुई थी।
रुचिन का आरोप था कि एसएचओ ने उन्हें धमकी दी, जबकि एसएचओ का दावा था कि इस दौरान रुचिन मेहरा ने मोबाइल उन्हें देते हुए कहा कि मेनका गांधी से बात कर लो। उन्होंने फोन पर बात की और कहा कि प्रथम दृष्टया स्कूल मालिक दोषी नहीं है।
एसएचओ ने इस घटना का जीडी में तस्करा भी दर्ज किया था। इस दौरान मुक्त कराया गया लंगूर थाने से भाग गया था।