जेम्स बांड की जिंदगी जीने का चलन और ख़ुद को साबित करने की होड़ ने स्पाई कैमरों को हमारी जिंदगी का हिस्सा बना दिया है। टीवी के स्टिंग ऑपरेशन से आज ये कैमरे आपकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके है।
करन जानना चाहते हैं कि उनकी गैरमौजूदगी में उनके घर पर कौन-कौन आता है इसके लिए उन्होंने घर में स्पाई कैम इंस्टॉल कर रखा है। आप ऑफिस में बैठे काम कर रहे हों या दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हों।
आप के काम पर नज़र सीसीटीवी कैमरों के जरिये रखी जा रही थी, लेकिन अब ये खूफिया कैमरे आपकी पर्सनल लाइफ पर भी नज़र रख रहे हैं।
दीवार घड़ी से लेकर हैंडबैग तक सभी कुछ स्पाई कैम से लैस हो चुका है। आप घर से बाहर जा रहे हैं, और देखना चाहते हैं कि आपका बच्चा आपके पीछे क्या-क्या करता है तो उसके लिए आपको कुछ पैसे खर्च कर एक स्पाई कैम खरीदना भर है।
कैमरे की इस नज़र को सभी अपने पास रखना चाहते हैं इसी चाहत ने स्पाई कैम के बिजनेस में उझाल पैदा किया। आज ये कैमरे आपके एक क्लिक पर आपकी जरुरत के मुताबिक आपके घर पर मौजूद है।
दोस्तों के हंसी मजाक, अपने से जुड़े संबंधियों की ज़िंदगी के इन्सीडेंट को कैप्चर करने का साधन भी ये स्पाई कैमरे बन गये हैं। यही वजह है कि यूंगस्टर्स ने इन कैमरों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है।
किस तरह के हैं ये स्पाई कैम
जहां स्पाई कैमरों ने बड़े-बड़े मामलों को उजागर किया है तो वहीं कई बुरी नियत के लोगों से बचाने में भी इन खूफिया कैमरों ने लोगों की मदद की है। अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक महिलाएं इन कैमरों को अपने हैंडबैग्स का हिस्सा बना रही हैं।
हैंडबैग, रिस्ट वॉच, नेक टाई, च्विंग गम कवर, शेविंग क्रीम ट्यूब, पेंडेंट, टेबल क्लॉक, टीवी, रेफ्रिजिरेटर तक सभी कुछ खूफिया हो चुका है। आप सोच रहे हैं कि आपको कोई नहीं देख रहा, तो हो सकता है कि घर में रखी ये बेजान चीजें आप पर नजर रख रही हों।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर मुक्तेश चन्द्र कहते हैं कि लोगों के द्वारा इस तरह के कैमरों का इस्तेमाल स्वागत योग्य है, लेकिन इसका अगर गलत इस्तेमाल होता है तो आइटी एक्ट के तहत ये अपराध है।
राइट टू प्राइवेसी जहां इन कैमरों की नजर पर काला कपड़ा डालने की कोशिश करता है तो वहीं रिटायर्ड जस्टिस आर.एस सोढी कहते हैं कि प्राइवेसी ज़रुरी है, लेकिन कोई अपने घर में इन कैमरों को लगाता है तो कोई कुछ नहीं कर सकता।