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खिलाड़ियों संग किया जा रहा मजदूरों से भी बुरा बर्ताव

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जिस राज्य में खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने पर नौकरी और मोटी पुरस्कार राशि की बारिश कर दी जाती है, वहीं राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान उन्हें एक दिन में तीन वक्त के भोजन के लिए सिर्फ सौ रुपये दिए जाते हैं।
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ऐसे में पेट काटकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की आस बेमानी ही मानी जा सकती है। अतिरिक्त शिक्षा खेल विभाग की ओर से आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए एक खिलाड़ी की खुराक की कीमत 100 रुपये तय की गई है।

हकीकत यह है कि इतनी राशि में एक वक्त का खाना ही सौ रुपये से अधिक का आता है। खिलाड़ियों का कहना है कि जब भी स्कूल से स्टेट और नेशनल खेलने जाते हैं तो उन्हें अपनी जेब से कम से कम 500 रुपये अतिरिक्त खर्र्च करने पड़ते हैं।
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राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले कबड्डी और फुटबॉल खिलाड़ियों ने बताया कि प्रतियोगिता स्थल पर न उन्हें रहने की अच्छी व्यवस्था मिलती है और न ही पेटभर खुराक।

कैंप तक पहुंचने के लिए खुद ही खर्च करते हैं पैसे

खिलाड़ियों ने बताया कि एक होटल में एक बटर रोटी की कीमत ही 12 से 15 रुपये की होती है और सलाद 20 रुपये का मिलता है।

सब्जी की कीमत 60 रुपये से कम नहीं होती, ऐसे में एक वक्त का खाना ही 100 रुपये से अधिक पड़ता है। फिर सौ रुपये में तीन वक्त का खाना तो सोचना भी मुश्किल है।

इतना ही नहीं खिलाड़ियों को स्टेशन टू स्टेशन का ही किराया मिलता है। वहां से कैंप तक पहुंचने के लिए भी खुद पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
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खिलाड़ियों का दुःख

मैं एक बार नेशनल और चार बार स्टेट लेवल पर कबड्डी खेल चुका हूं। अंतिम राज्यस्तरीय प्रतियोगिता रेवाड़ी में खेली थी। तीन टाइम के खाने के लिए 100 रुपये मिले थे। इसके अलावा रहने की व्यवस्था भी खुद की थी। -अशोक, कबड्डी खिलाड़ी

मैंने अंतिम बार सोनीपत स्टेट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इस बार प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले कई बार सोच रहा हूं कि उसमें हिस्सा लूं या न। क्योंकि प्रतियोगिता में भाग लेने का मतलब अपने पास से अतिरिक्त रुपये खर्च करना। -शशांक, फुटबॉल खिलाड़ी

खिलाड़ियों में प्रतिभा बहुत है, लेकिन खेल सुविधा और सामग्री की कमी की वजह से तराशा नहीं जा सकता। विभाग की ओर से 100 रुपये खाने के लिए दिए जाते हैं। प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के लिए 250, 150 और 100 रुपये मिलते हैं। -डॉ. सुखपाल, डीपी, राजकीय बाल माध्यमिक विद्यालय
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