गुड़गांव के शिकोहपुर गांव में राजस्थान के किसान की जमीन को खरीद कर उसका सीएलयू करा कर डीएलएफ को देने की डील चर्चा का विषय बना हुआ है।
गांव की चौपाल से लेकर जिला नगर योजनाकार विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ। अमर उजाला ने शिकोहपुर गांव की लगती जमीन का पड़ताल किया तो वहां पर एक सुरक्षा गार्ड मिला। जिसने बताया कि उसका इससे संबध नहीं है।
लोग इसे वाड्रा वाली जमीन के नाम से जानते है। साढे़ चार एकड़ के भू भाग में आम के पेड़ व टयूबेल लगे हुए हैं। साथ में एक विरान सी कोठी भी है। जो खाली पड़ी है।
किसी जमाने में वह कोठी हाईवे पर गुजरने वालों के आकर्षण का केन्द्र हुआ करती थी। इस जमीन की रजिस्ट्री दो करोड़ पांच लारख में हुई थी।
इसके ढाई एकड़ में होटल व कामर्शियल पास कराने के बाद सह सौदा वाड्रा ने 58 करोड़ की दर से डीएलएफ को बेच दी। जिला नगर योजनाकार विभाग कार्यालय में इस बात को लेकर चर्चा रही कि उनका रोल तो केवल फाइल उपर भेजने का रहा है।
खाली पड़ा है साढ़े चार एकड़ का मैदान
वाड्रा की डील में दी गई जमीन पर डीएलएफ ने अपना प्रोजेक्ट बनाना नहीं शुरु किया है। जबकि उसके बगल में डीएलएफ का अपार्टमेंट बन रहा है। टीवी चैनल व अखबार को छायाकारों की ओर से कभी-कभी लोग इसे कैद करते जरुर नजर आते हैं।