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रूह कंपा देंगी ये छह अपराध कथाएं!

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दिल्ली से सटे निठारी में खौफनाक वारदातों को अंजाम देने वाले सुरेंद्र कोली को फांसी दी जाने वाली है। उसके अपराध की भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसके बाद उसे 'नर पिशाच' कहा जाने लगा। दिल्ली अपराध से जुड़ी कुछ अन्य घटनाएं भी हैं, निठारी कांड का जिक्र होने पर जिनकी यादें ताजा हो जाती हैं।
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इसमें पहली घटना उस रात की है, जिस रात 10 बजकर 21 मिनट पर पीसीआर पर आई एक फोन कॉल ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस कॉल में कहा गया था कि महिपालपुर फ्लाईओवर से उतरते ही गुड़गांव से दिल्ली की तरफ जा रही सड़क पर एक लड़का और लड़की बिना कपड़ों के बैठे हुए हैं। वहां काफी लोगों की भीड़ जमा है।

साकेत कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक उस रात 9 बजकर 16 मिनट पर डीएल1 पी-0149 नंबर की बस में मुनिरका बस स्टैंड से एक 23 साल की लड़की और उसका दोस्त चढ़े। वे साकेत सेलेक्ट सिटी से फिल्म देखकर निकले थे और उन्हें द्वारका जाना था। बस में क्लीनर, ड्राइवर के अलावा चार और लोग बैठे थे। इनमें से एक तो वयस्क भी नहीं था यानी उसकी उम्र 18 वर्ष से भी कम थी।
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लड़के और लड़की को तब लगा कि बस में बैठे लोग भी उन्हीं की तरह सवारी हैं। लेकिन मलाई मंदिर पार करते ही जैसे सब कुछ बदल गया। संजय टी प्वाइंट से एयरपोर्ट फ्लाईओवर पर चढ़ते ही केबिन से तीन लोग बाहर निकले और लड़की के दोस्त से पूछा, 'रात को लड़की लेकर कहां जा रहा है।' थोड़ी कहासुनी के बाद लड़के की पिटाई करने लगे।

बलात्कार के बाद की जान से मारने की कोशिश

लड़की और उसके दोस्त ने शोर मचाया तो लड़के को रॉड से पीटा जाने लगा और उसके कपड़े उतारकर दो सीटों के बीच में डाल दिया गया। उसके बाद बस के पिछले हिस्से में लड़की के साथ बारी-बारी से बलात्कार किया गया। इस दरिंदगी के दौरान बस सड़कों पर भागती रही और सभी छह आरोपियों ने लड़की के साथ बलात्कार ही नहीं, बल्कि उसके साथ अमानवीय व्यवहार करते रहे। इतनी दरिंदगी लड़की झेल नहीं पाई और अचेत हो गई।

लड़की को अचेत देख आरोपियों को लगा कि उसने दम तोड़ दिया है। उन्होंने लड़की और उसके दोस्त को महिपालपुर के पास बस से नीचे फेंक दिया। फिर उन पर बस चढ़ाने की कोशिश की। लड़के ने अपने बयान में कहा कि अगर उसने लड़की को अपनी ओर ना खींचा होता तो आरोपी उस पर बस को चढ़ा देते।

दरिंदगी के 13 दिन बाद इलाज के दौरान लड़की ने दम तोड़ दिया। मामले में एक आरोपी की जेल में ही मौत हो गई। एक नाबालिग आरोपी बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। अन्य चार अपराधियों को निचली अदालतों ने फांसी की सजा सजा दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में मृत्यूदंड को उम्रकैद में बदल दिया गया। इसे घटना को निर्भया कांड, दामिनी कांड, दिल्ली गैंगरेप या और भी कई नाम दिए गए।

बीवी को मार कर तंदूर में भून डाला

क्रूरता की हदें पार करने वाले इस वाकये को तंदूर हत्याकांड के नाम से जानते हैं। इसमें एक कांग्रेसी नेता ने अपनी पत्नी को गोली मारने के बाद बड़ी बेरहमी से चाकू से बोटी-बोटी काटकर तंदूर में झोंक दिया था। जब लाश नहीं जली तो उसने तंदूर में मक्‍खन डालकर जलाने कोशिश की थी।

कहानी 18 साल पहले की है। तत्कालीन दिल्ली युवक कांग्रेस के अध्यक्ष व विधायक सुशील शर्मा ने निर्दयता से अपनी पायलट पत्नी नैना साहनी की हत्याकर लाश ठिकाने लगा दी थी। वो तो भला हो कूड़ा बीनने वाली उस वृद्ध महिला का जिसने आधी रात को अशोक यात्री निवास से धुआं निकलता देखा और सजगता दिखाई। ये वही यात्री निवास था जिसका मालिक सुशील था।

आरोप है कि सुशील को शक था कि उसकी पत्नी का किसी और के सा‌थ संबंध है। इसी वजह से उसने आधी रात को अपने ही घर में गोली मारकर हत्‍या की दी और उसके शव को कई टुकड़ों में काट दिया। शव को छिपाने के लिए शर्मा ने उसी रात दिल्‍ली के बगिया रेस्‍टोरेंट के तंदूर में डाल दिया था।

मामले में जांच के बाद पूरी तरह स्पष्ट हो गया था कि उसने न सिर्फ अपनी पत्नी की हत्या बल्कि उसके शव को निर्ममता से काटकर तंदूर में जलाने की भी कोशिश की। लेकिन सजा से बचने के ‌लिए उसने अपने राजनीतिक संपर्कों का भी भरपूर इस्तेमाल किया। लंबी जद्दोजहद के बाद उसे फांसी की सजा सुनाई गई। बाद में उसे सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दी। सुशील अभी जेल में है।

अब तक की सबसे चर्चित ऑनर ‌किलिंग

ऑनर ‌किलिंग का यह अब तक का सबसे चर्चित मामला है। सीबीआई और पुलिस की लंबी जांच के बाद उस जानेमाने डॉक्टर दंपति पर आरोप तया हुआ, जिसने अपनी नाबालिग बेटी और नौकर को बेरहमी से मौत के घाट उतारने दिया था। नोएडा के एक फ्लैट में 15-16 मई 2008 की रात दो कत्ल हुए। दोनों को गोल्फ स्टिक से घायल करने के बाद सर्जरी करने वाले चाकू से दोनों का गला काट दिया गया था।

सीबीआई के वकील ने लंबी जांच पड़ताल के बाद अदालत में घाटना वाली रात 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक की पुरी कहानी सुनाई थी।

सीबीआई वकील एसपी एजीएल कौल के अनुसार "करीब 12 बजे जब राजेश तलवार और उनकी पत्नी नुपुर तलवार अपने कमरे में थे तो उन्हें बाहर से कुछ आवाजें सुनाई दे रही थीं। वे हेमराज के कमरे में गए लेकिन हेमराज वहां मौजूद नहीं था। उन्होंने उसके कमरे में रखी गोल्फस्टिक उठाई और अपनी बेटी के कमरे में गए।"

उन्होंने बताया कि "आरुषि का कमरा लॉक नहीं था। जब वह उस कमरे में गए तो उन्होंने अपनी बेटी को नौकर के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा। इससे वह अपना आप खो बैठे और गुस्से में गोल्फस्टिक हेमराज को मारनी चाही, लेकिन गलती से वह स्टिक आरुषि को लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद हेमराज की भी हत्या कर दी। हत्या के बाद दंपति ने हेमराज की लाश छत पर पहुंचा दी"

मामला हाईप्रोफाइल होने की वजह से काफी लंबा खींचा। अंततः आरोप तय होने के बाद कोर्ट ने पति-पत्नी को उम्रकैद की सजा सुनाई। फिलहाल राजेश तलवार और उनकी पत्नी नुपुर तलवार जेल में हैं। इस पूरी घटना पर जानेमाने गीतकार गुलजार की बेटी बॉलीवुड फिल्म बना रही हैं।

दर्दनाक है इस लड़की की कहानी

हाल ही में आई बॉलीवुड फिल्म हेट स्टोरी-2 की कहानी इस निर्दोष की दर्दनाक कहानी से मिलती है। एक लड़की ने 12वीं पास करने के बाद एयर होस्टेस बनने के लिए पढ़ाई की। प‌ढ़ाई पूरी करके उसने एक एयलाइंस कंपनी में बतौर ट्रेनी केबिन क्रू ज्वाइन किया। कुछ ही दिन बीते थे कि उसे सीनियर केबिन क्रू पद पर प्रमोट कर दिया गया। छह महीने के भीतर उसे दोबारा प्रमोशन देकर कोआर्डिनेटर बना दिया गया।

लेकिन साल भर बाद ही उसने एयरलाइंस कंपनी से इस्तीफा दे दिया और आत्महत्या कर ली। लेकिन ये आत्महत्या कोई आम आत्महत्या नहीं थी। एयरलाइंस के मालिक पर आरोप है कि उसकी वजह से लड़की को आत्महत्या करने पर बाध्य होना पड़ा। उस पर लगातार लड़की पर नजर रखने और उसे अकेला न छोड़ने, शारीरिक शोषण करने का आरोप है। पुलिस की जांच कहती है कि इसी वजह से लड़की ने मौत का रास्ता चुना।

वह लड़की थी गीतिका शर्मा और आरोपी हरियाणा के पूर्व मंत्री व हरियाणा लोकहित पार्टी के संयोजक गोपाल कांडा हैं। गीतिका गोपाल कांडा की एमडीएलआर एयरलाइंस में काम करती थी। यहां से नौकरी छोड़ने के बाद वह दुबई जाकर अमीरात एयरलाइंस में ट्रेनिंग कर रही थी। लेकिन आरोप है कि कांडा उसे वहां भी परेशान करते रहे।

अमीरात एयरलाइंस को ई-मेल भेजकर गीतिका पर तरह-तरह के आरोप लगाते रहे। यहां तक कि उसके चरित्र पर भी सवाल खड़ा करते रहे। इसके चलते गीतिका को वहां से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद गीतिका शर्मा ने आत्महत्या की। मामले में हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा और उनके सहयोगी अरुणा चड्ढा को जेल हुई थी। कुछ महीनों पहले कांडा जमानत पर छूट गए और हरियाणा की राजनीति में वापसी कर ली। वह फिलहाल हरियाणा विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहे हैं।

अभी तक नहीं सुलझी उस भयानक घटना की गुत्थी

12 साल पहले दिल्ली के महरौली स्थित कुतुब कोलोनेड रेस्टोरेंट में सोशलाइट बीना रमानी ने पार्टी दी थी। इसमें दिल्ली की कई नामी हस्तियों ने शिरकत की थी। उसमें कांग्रेसी नेती विनोद शर्मा का बेटा सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मनु शर्मा भी अपने दोस्तों के पहुंचा। रात के 2 बज रहे थे, पार्टी में शराब सर्व होने का टाइम खत्म हो चुका था। तभी उसने शराब सर्व करने वाली लड़की जेसिका लाल से शराब मांगी। लेकिन टाइम खत्म हो जाने के कारण जसिका ने शराब देने से मना कर दिया।

पुलिस की जांच कहती है कि नाराज मनु शर्मा ने अपनी पिस्टल से फायरिंग की। पहली गोली हवा में और दूसरी जेसिका के सिर में मारी। उसके बाद मनु अपने दोस्तों के साथ फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने इस मामले में 101 गवाह बनाए जिसमें श्यान मुंशी व बीना रमानी प्रमुख थे। श्यान मुंशी मामले का शिकायती बना और उसी के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई।

लेकिन सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह श्यान मुंशी अपने बयान से मुकर गया। कुल 33 महत्वपूर्ण गवाह अपने बयान से मुकर गए। श्यान मुंशी ने बयान दिया कि मनु शर्मा वह आदमी नहीं है जिसने गोली चलाई। उसने यह भी कहा कि गोलियां एक पिस्टल से नहीं बल्कि दो पिस्टल से चली थीं। पुलिस की जांच कहती है कि मनु ने अपनी पिस्टल से पहली गोली हवा में चलाई थी और फिर उसने जेसिका की गोली मारकर हत्या कर दी।

पुलिस ने दोनों कारतूसों के खोखे सीएफएसएल भेजे और वहां की रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों गोलियां अलग-अलग पिस्टल से चली थीं। मामले की लंबी सुनवाई के दौरान मनु को जमानत मिल गई थी। पटियाला हाउस स्थित तत्कालीन अडिशनल सेशन जज एसएल भयाना ने तमाम आरोपियों को बरी करते हुए पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इस फैसले को पुलिस ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने बीना रमानी और उनके परिजनों आदि के बयान को अहम माना। मनु की ओर से हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। उसके वकील राम जेठमलानी ने दलील दी कि पुलिस ने मनु शर्मा को इस मामले में फंसाने की कोशिश की है, जबकि असलियत यह है कि जेसिका को किसी अन्य ने गोली मारी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मनु शर्मा की ओर से पेश दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। बाद में मनु की पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई। लंबी सुनवाई के बाद मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वह फिलहाल जेल में है। इस घटना पर 'नो वन किल्ड जेसिका' नाम की बॉलीवुड फिल्म भी बन चुकी है।
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बदला लेने के लिए किया गया गैंगरेप

इस घटना की चर्चा छावला गैंगरेप के नाम से होती है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 9 फरवरी 2012 को 19 वर्षीय युवती तीन सहेलियों के साथ अपने कार्यालय से वापस लौट रही थी। रात करीब 8.35 बजे तीनों आरोपियों ने कुतुब विहार से जबरन अपहरण कर लिया और कार से रेवाड़ी, हरियाणा ले गए।

घटना के तीन दिन बाद युवती का शव बरामद हुआ। अभियोजन पक्ष के अनुसार युवती के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के कई निशान थे। दअरसल, आरोपियों ने गैंगरेप के दौरान सभी मानवीय सीमाएं पार कर दीं थीं। उन्होंने लड़की पर नाजुक अंगों पर लोहे की रॉड से हमला करने के अलावा उस पर तेजाब भी डाल दिया था।

आरोप है कि दोषी रवि युवती से दोस्ती करना चाहता था, लेकिन मना करने पर अपने दो साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में 49 गवाह पेश किए।

निचली अदालत में हुई सुनवाई के बाद अब हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत ने दोषियों रवि कुमार (23) राहुल (27) और विनोद (23) को सभी साक्ष्यों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 376 (2) (जी) व 302 के तहत अपहरण, गैंगरेप व हत्या के आरोप में मृत्युदंड की सजा दी है।
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