दिल्ली पुलिस अगर स्पेशल ब्रांच की सलाह मान लेती तो तुगलकाबाद में बवाल नहीं होता। तीन जिलों की पुलिस ने स्पेशल ब्रांच की एडवाइजरी को गंभीरता से नहीं लिया। भीम सेना के प्रदर्शनकारियों ने बुधवार सुबह से लेकर रात साढ़े आठ बजे तक दिल्ली की सड़कों को अपने कब्जे में रखा और रविदास मार्ग पर बवाल काटा।
हालांकि अधिकतर प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दिया गया लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उन जित्मेवार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जिनकी लापरवाही से दिल्ली में इतना उपद्रव हुआ। सूत्रों की माने तो दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक सड़कों पर हुए बवाल से कई पुलिस अधिकारियों की भूमिका से खासे खफा भी हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के शुरुआती इनपट को जांचना भी शुरू कर दिया है।
स्पेशल ब्रांच के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अपराध शाखा ने करीब 10 दिन पहले दिल्ली पुलिस व ट्रैफिक पुलिस को एडवाइजरी जारी की थी कि रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश से लोग दिल्ली आ सकते हैं। हालांकि शुरुआत में ये इनपुट्स थे कि कम लोग आएंगे। बाद में स्पेशल ब्रांच ने आठ हजार लोगों के दिल्ली आने की आशंका जताई थी।
इसके बाद भारी संख्या में भीम सेना व बहुजन समाज के लोगों के दिल्ली में आने की तीसरी एडवाइजरी जारी गई। मध्य जिला, नई दिल्ली व दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने इन इनपुट्स को गंभीरता से नहीं लिया। रामलीला मैदान के बाद प्रदर्शनकारियों को खुला छोड़ दिया गया जबकि प्रदर्शनकारी हंडा, लाठी, रॉड आदि लिए हुए थे।
प्रदर्शनकारी नई दिल्ली से जाकिर हुसैन मार्ग, आश्रम व कैप्टन गौड मार्ग होते हुए तुगलकाबाद पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल नहीं था। दिल्ली पुलिस अधिकारियों को यह लग रहा था कि प्रदर्शनकारी नई दिल्ली से तुगलकाबाद जाते- जाते थक जाएंगे और बीच रास्ते से अपने घर चले गए। मगर ज्यादातर प्रदर्शनकारी पैदल ही तुगलकाबाद पहुंच गए।
दिल्ली पुलिस के ही कई वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान, नई दिल्ली या फिर आगे रोका जा सकता था। दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की भीड़ का अंदाजा नहीं लगा पाई थी। यह भी अंदाजा नहीं लगा पाई कि तुगलकाबाद कितने प्रदर्शनकारी पहुंचेंगे।