सौम्या विश्वनाथन के हत्यारों को दोषी ठहराने में रवि कपूर का कबूलनामा और देसी कट्टे की बरामदगी खासी अहम साबित हुई। मौके की एफएसएल की रिपोर्ट और दोषियों की लोकेशन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (वर्तमान में स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त) एचजीएस धालीवाल ने कहा कि जांच टीम ने तह तक तफ्तीश की और हत्यारों को दोषी करार दिलाने में कामयाब रही।
वारदात में इस्तेमाल कार को बेच नहीं सका अजय सेठी
सौम्या मामले में दोषी करार दिए गए अजय सेठी फरीदाबाद में चोरी के वाहन खरीदता था। वह चोरी किए गए वाहनों के कागजात तैयार कराकर बेचता था। इसके एवज में मोटी रकम वसूलता था। रवि कपूर भी अजय सेठी कोे चोरी के वाहन देता था। चोरी के वाहन देते समय रवि हमेशा मोलभाव करता था। सौम्या मामले में प्रयुक्त वैगनआर को देते हुए रवि ने मोलभाव नहीं किया था और गाड़ी को जल्द बेचने के लिए कहा था। इस बात पर अजय को शक हुआ। था। सौम्या की गाड़ी से टकराने के कारण वैगनआर पर रगड़ के निशान थे। हालांकि अजय सेठी इस कार को नहीं बेच पाया। पुलिस ने कार जब्त कर ली जो जो दोषियों के खिलाफ अहम सबूत बनी।
पुलिस जांच में पता चला कि वर्ष 1965 में देहरादून में पैदा हुआ अजय सेठी ने वहीं केडीएवी कॉलेज से स्नातक किया था। उसके पिता दूध का व्यवसाय करते थे। दूध की सप्लाई करने वाले लोगों के जरिये उसका संपर्क नन्हे और जब्बार गिरोह से संपर्क हो गया। इनके साथ मिलकर उसने लूटपाट शुरू कर दी। वह 1990, 1993, 98 और 2002 में गिरफ्तार हुआ। वहां गुंडा एक्ट लगाने के बाद दिल्ली आ गया। यहां यह फिर इंद्रपुरी के बदमाश अजय भेंगा के संपर्क में आया। उसके बाद वह रवि कपूर के संपर्क में आया।
सुबह के समय करते थे वारदात
पुलिस जांच में पता चला कि रवि कपूर गिरोह के बदमाश तड़के साढ़े तीन बजे से साढ़े चार बजे तक वारदात करते थे। गिरोह के बदमाशों ने सौम्या की हत्या तड़के साढ़े तीन बजे, जिगिषा की हत्या सुबह तड़के साढ़े चार बजे और दिल्ली कैंट में व्यक्ति के साथ लूटपाट सुबह चार बजे के करीब की थी
अजय करता था इन्हें ब्लैकमेल
रवि कपूर, बलजीत, अजय व अमित ने सौम्या विश्वनाथन की हत्या में शामिल थे। अजय पुलिस को जानकारी देने की बात कहकर रवि, बलजीत और अमितनको ब्लैकमेल करता रहता था। इस बात पर तीनों अजय से नाराज थे।
मैच देखने के लिए जल्द लौट रही थी जिगिषा
जिगिषा क्रिकेट की बहुत शौकीन थी। वह जल्द घर आकर न्यूजीलैंड और भारत के बीच फाइनल मैच को देखना चाहती थी। वह स्कूल टॉपर रह चुकी थी। वारदात से एक माह पहले ही बिजनेस एक्सीलेंट अवार्ड मिला था। उसने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ मैंनेजमेंट व टेक्नोलॉजी से मैंनेजमेंट में स्नातक किया था। उसे कंपनी से 40 हजार प्रति माह तनख्वाह मिलती थी।
कब, क्या हुआ