फरीदाबाद के नीमका जेल में फंदा लगाकर आत्महत्या करने वाले सोनू का शव बीके सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस से गायब होने की सूचना पर परिजनों ने घंटों हंगामा किया। शव न मिलने से पुलिस और सिविल अस्पताल प्रबंधन में भी अफरातफरी मच गई।
बाद में डॉक्टरों ने परिजनों को समझाया कि गर्मी के कारण शव फूल गया है, इसलिए पहचान में नहीं आ रहा है। दोबारा से शवों को दिखाकर सोनू के शव की पहचान की गई। इसके बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू हुई।
गांव शाहजहांपुर निवासी 22 वर्षीय सोनू को विगत 14 जून को छांयसा पुलिस ने मारपीट और पुलिस पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बुधवार को सोनू ने नीमका जेल में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, जिसपर ग्रामीणों ने जेल के बाहर काफी हंगामा और चांदपुर चौकी पर पथराव किया था।
शुक्रवार को बीके सिविल अस्पताल में तीन डॉक्टरों के पैनल से सोनू के शव का पोस्टमार्टम होना था। दोपहर करीब एक बजे तीनों डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और थोड़ी देर बाद ही वापस बाहर आ गए। इस दौरान किसी ने ग्रामीणों को बताया कि पोस्टमार्टम हाउस से सोनू का शव गायब है, इसलिए डॉक्टर वापस चले गए हैं।
इसका पता चलते ही ग्रामीणों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। पुलिस को जब इस बारे में पता चला तो उनके भी हाथ पांव फूल गए। आनन-फानन में पुलिस अधिकारी परिवार के तीन-चार लोगों को पोस्टमार्टम हाउस में लेकर गए और वहां रखे सभी शव दिखाकर सोनू की शिनाख्त करवाने का प्रयास किया।
सभी शव देखने के बाद परिजनों ने उनमें सोनू का शव होने से इंकार कर दिया। काफी देर तक शवगृह पर हंगामा होता रहा। फिर डॉ. विकास शर्मा ने लोगों को समझाया कि गर्मी के कारण शव फूल गया है और काला पड़ गया है।
इस कारण से वह पहचान नहीं कर पा रहे हैं। पहले तो ग्रामीण नहीं माने, मगर काफी समझाने पर उन्होंने दोबारा शव देखा और उसकी पहचान सोनू के रूप में की, जिसके बाद सोनू के शव का पोस्टमार्टम हो सका।