अभी भी अपने वंश को चलाने के लिए बेटा होना जरूरी समझा जाता है। इसके लिए कुछ लोग कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। मेवात क्षेत्र में आज भी ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने पति के दबाव में बेटे की चाहत में 12 लड़कियां पैदा कर लीं।
28 जून को आरफा (बदला हुआ नाम) का वंश चलाने की उम्मीद उस समय टूट गई। जब उसने मेडिकल कॉलेज नलहड़ में 12वीं संतान लड़की को जन्म दिया। लेकिन उसका पति अभी भी बेटा चाहता है। जबकि वह मजदूरी करके बच्चों का पालन पोषण करता है।
जनगणना 2011 के मुताबिक मेवात की आबादी करीब 11 लाख थी। औसतन मेवात के हरेक परिवार में 6 से 8 बच्चे हैं। बढ़ती जनसंख्या और रोजगार के साधन कम होने के कारण मेवात में बेरोजगारी चरम पर है।
आज दो लाख से ज्यादा युवा या तो मजदूरी कर रहे हैं या ट्रक ड्राइवरी से जुडे़ हैं। ऐसे में वंश चलाने के लिए बेटे की चाहत बढ़ना भी आबादी दर में बढ़ोतरी का बड़ा कारण बना हुआ है। मेवात का लिंगानुपात 1000 लड़कों पर 932 लड़कियों का है। आरफा का 17 साल पहले निकाह हुआ था। तब उसकी उम्र 18 साल के करीब थी।
आज 34 साल की उम्र में वह 12 लड़कियों को जन्म दे चुकी है। 12 बच्चे होने के कारण सलमा बीमार रहती है। उसक दो बेटियों की जापे के दौरान ही मौत हो चुकी है।
इससे पहले नूंह खंड के ही एक गांव की फातिमा (बदला हुआ नाम) ने वंश को कायम रखने के लिए 11 बेटियों को जन्म दिया था। मेवात के ही एक गांव की अकीला (बदला हुआ नाम) ने 23 संतानों को जन्म दिया था।
12 बेटियां पैदा करने वाली आरफा के पति आविद (बदला हुआ नाम) ने बताया कि समाज में धारणा है कि बेटों से ही वंश चलता है। इसी लिए बेटे की चाहत में 12 लडकियां हो चुकी हैं।