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Sonia Gandhi: सोनिया गांधी को कोर्ट से मिली मोहलत, 'नागरिकता से पहले वोट' केस मामले में देना है जवाब

Tue, 06 Jan 2026 05:19 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

यह मामला 9 दिसंबर को न्यायाधीश गोगाने द्वारा सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करने के बाद सामने आया था, जिसमें उनसे जवाब मांगा गया था। मंगलवार को जब मामले की सुनवाई हुई, तो सोनिया गांधी के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय मांगा।
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सोनिया गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को एक याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 7 फरवरी तक का समय दिया है। यह याचिका एक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती देती है जिसमें 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से तीन साल पहले उन्हें मतदाता सूची में शामिल करने के आरोप की जांच करने से इनकार कर दिया गया था।

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वकील ने मांग और वक्त
यह मामला 9 दिसंबर को न्यायाधीश गोगाने द्वारा सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करने के बाद सामने आया था, जिसमें उनसे जवाब मांगा गया था। मंगलवार को जब मामले की सुनवाई हुई, तो सोनिया गांधी के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 7 फरवरी तय की।

मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती
यह याचिका वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई थी, जो राउज एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैं। 11 सितंबर के मजिस्ट्रेट आदेश में उनकी शिकायत खारिज कर दी गई थी। अदालत ने कहा था कि शिकायत इस तरह से तैयार की गई थी कि वह कानूनी रूप से अस्थिर, सार में अपर्याप्त और इस मंच के अधिकार क्षेत्र से परे आरोपों के माध्यम से अदालत को अधिकार क्षेत्र प्रदान करने के उद्देश्य से थी।

आरोपों का आधार
त्रिपाठी के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नरंग ने मजिस्ट्रेट अदालत में आरोप लगाया था कि जनवरी 1980 में सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में जोड़ा गया था, जब वह भारतीय नागरिक नहीं थीं। उन्होंने कुछ जालसाजी और एक सार्वजनिक प्राधिकारी को धोखा देने का दावा किया था।

मजिस्ट्रेट का रुख
हालांकि, मजिस्ट्रेट ने जांच की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अदालत को ऐसे अधिकार क्षेत्र को मानने के लिए राजी करके आपराधिक कानून को गति देने की मांग की थी, जो कानूनी रूप से उसके पास नहीं था। उन्होंने अवलोकन किया कि धोखाधड़ी या जालसाजी के वैधानिक तत्वों को आकर्षित करने के लिए आवश्यक विवरणों के बिना, केवल निराधार दावे कानूनी रूप से टिकाऊ आरोप का विकल्प नहीं हो सकते।
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अदालत की कड़ी टिप्पणी
मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह याचिका केवल मतदाता सूची के एक अंश पर निर्भर करती है, जो 1980 की एक अप्रमाणित मतदाता सूची के कथित अंश की फोटोकॉपी की फोटोकॉपी थी। शिकायत की निंदा करते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस तरह का तरीका, सार रूप में, केवल अधिकार क्षेत्र बनाने के लिए जहां कोई मौजूद नहीं है, आपराधिकता के चोले में एक नागरिक या सामान्य विवाद को पेश करके कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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