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सोनम वांगचुक ने बढ़ाई भूख हड़ताल: अस्पताल से लिखी चिट्ठी, बताया कब तक नहीं तोड़ेंगे अनशन; कहा- बहुत आहत हूं

Mon, 20 Jul 2026 07:38 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

21 दिनों के उपवास के बाद 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद से वांगचुक वहीं भर्ती हैं। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें 'गैर-कानूनी हिरासत' में रखा गया है, हालांकि अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
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सोनम वांगचुक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई से दुखी होकर उन्होंने कहा कि वह अपना उपवास तब तक आगे बढ़ाएंगे जब तक कि युवा नेताओं को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती या उन्हें खुद अस्पताल में सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं मिलती।

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नोट लिखकर जारी किया संदेश
सफदरजंग अस्पताल से जारी एक हस्तलिखित बयान में वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया है, उसे देखते हुए मैंने अपना उपवास तब तक जारी रखने का फैसला किया है जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने नहीं दिया जाता, या फिर मुझे अस्पताल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिलती। उन्होंने आगे कहा, 'उम्मीद है कि सरकार इससे पहले शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी।'

'उकसावे के बावजूद युवाओं ने बनाए रखी शांति'
वांगचुक ने कहा कि उकसावे के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने जिस तरह से शांति बनाए रखी, उससे वह बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि मैं सरकार और पुलिस बल से अपील करता हूं कि वे छात्रों को आज या कल संसद के समक्ष अपनी शिकायतें प्रस्तुत करने की अनुमति देकर इस मुद्दे को हल करें। मुझे विश्वास है कि युवा प्रदर्शनकारी कल भी शांति बनाए रखेंगे।

अस्पताल से जारी है आंदोलन
उल्लेखनीय है कि 21 दिनों के उपवास के बाद 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद से वांगचुक वहीं भर्ती हैं। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें 'गैर-कानूनी हिरासत' में रखा गया है, हालांकि अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
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अनशन खत्म करने की रखी थी शर्त
इससे पहले वांगचुक ने कहा था कि वह अपना उपवास तभी समाप्त करेंगे जब सरकार शिक्षा प्रणाली में कथित विफलताओं की जिम्मेदारी लेगी या राजनीतिक नेता संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन देंगे। हालांकि, मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद उन्होंने अपनी हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया।

सीजेपी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और जवाबदेही तय करने के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।
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