साहिबाबाद में पांच दिन से पंचशील एनक्लेव निवासी एक ड्राइवर का शव उसी के घर की दूसरी मंजिल पर रसोई में लटका हुआ था जबकि उसकी बूढ़ी और बीमार मां इस बात से अंजान थी।
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बुधवार सुबह बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी तो ड्राइवर की सुसाइड का पता चला। बताया जा रहा है कि ड्राइवर की मां दिमागी रूप से कमजोर है। पत्नी के साथ विवाद के चलते सुसाइड का मामला मानकर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पंचशील एनक्लेव निवासी राजीव पाल (35) यहां अपनी मां के साथ रहता था। वह गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल की गाड़ी चलाता था। पांच साल पहले उसकी शादी लोनी निवासी युवती से हुई थी। उनकी दो साल की एक बेटी भी है।
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पत्नी से चल रहा विवाद, दिमागी रूप से कमजोर भी हैं मां
डेमो
- फोटो : demo pic
मां के अनुसार करीब एक साल से राजीव का पत्नी के साथ विवाद चल रहा था। पत्नी मायके में ही रह रही है। बुधवार सुबह करीब 10 बजे बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी तो पुलिस राजीव के घर पहुंची।
मकान की दूसरी मंजिल पर बनी रसोई के एंगल से कपड़े से बंधा राजीव का शव लटका हुआ था। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
एसएचओ साहिबाबाद धीरेंद्र यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला पत्नी से विवाद के चलते सुसाइड का लग रहा है। एसएचओ ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारण का पता चल सकेगा।
मां यही सोच रही थीं काम पर गया है राजीव
आत्महत्या करने वाला राजीव
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, पत्नी से विवाद के बाद से राजीव को अक्सर महिला थाना जाना पड़ता था। तीन मार्च को भी वह महिला थाने से होकर ही घर लौटा था। मां ने बताया कि थाने से आने के बाद वह परेशान था। उसके बाद पता नहीं वह कहां गया। एसएचओ ने बताया कि राजीव की मां दिमागी रूप से कमजोर और बीमार हैं।
वह सीढ़ियां भी नहीं चढ़ सकतीं। उन्होंने बताया है कि वह सोच रही थीं कि उनका बेटा काम पर गया है। राजीव की मां पांच दिन तक यही समझती रहीं कि उनका बेटा काम पर अस्पताल गया है।
दिमागी रूप से कमजोर होने के चलते उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं हुआ कि उनके बेटे ने घर में ही सुसाइड कर लिया है। पुलिस का कहना है कि अगर पड़ोसी न बताते तो शायद राजीव की लाश और कई दिन और सड़ती रहती।
तीन मार्च को महिला थाने से लौटा था राजीव
लड़ाई देखकर बुजुर्ग की मौत
राजीव की मां ने ही पुलिस को बताया है कि तीन तारीख को उनका बेटा महिला थाने गया था। वहां से लौटने के बाद वह परेशान था। इसके बाद उसने कहा कि वह बाहर जा रहा है। उन्होंने सोचा कि उनका बेटा काम पर गया है।
एसएचओ धीरेंद्र यादव ने बताया कि राजीव की मां को यह पता ही नहीं चला कि उनके बेटे को घर से गए पांच दिन बीत चुके हैं। उन्होंने उसकी गुमशुदगी भी दर्ज नहीं कराई।
उन्होंने बताया कि वह बीमार हैं और सीढ़ियों पर भी नहीं चढ़ सकतीं। पड़ोसियों ने बताया है कि चार-पांच दिन पहले उन्होंने राजीव को देखा था। एसएचओ ने बताया कि राजीव की मां की दिमागी हालत को देखते हुए पड़ोसियों ने उन्हें बेटे की मौत की जानकारी देने से मना किया है।
उन्हें बताने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि बेटा बीमार है। ठीक हो जाएगा। अस्पताल से पता लगा है कि वह तीन तारीख के बाद से अस्पताल नहीं गया था।
एसएचओ साहिबाबाद धीरेंद्र यादव का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि राजीव की मौत कब हुई है। उसका पत्नी के साथ गृह क्लेश का केस महिला थाने में चल रहा है, जिसके चलते वह परेशान रहता था।
पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने बताया कि दो दिन पहले राजीव के घर का दरवाजा खुला देखकर उन्होंने उसकी मां से राजीव के बारे में पूछा था। तब उन्होंने महिला को भी यही बताया कि राजीव अस्पताल काम पर गया है।
हालांकि आसपास के लोगों को लग रहा था कि वह कहीं गायब है। मंगलवार दोपहर से राजीव के घर से बदबू आ रही थी। जब बुधवार को बदबू बढ़ गई तो पड़ोसियों ने पुलिस से राजीव के घर में कुछ गड़बड़ी होने का शक जताया।
पहले भी आ चुके हैं इस तरह के मामले
14 अप्रैल 2015 में वसुंधरा सेक्टर-3 रेल विहार सोसायटी में फ्लैट में बंद मिला था मां-बेटे का शव
20 मार्च 2014 वैशाली सेक्टर-5 में बंद फ्लैट में मिला बुजुर्ग का शव