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Solution : किताबों की पायरेसी पर नकेल कसेगा आईआईटी कानपुर, एनसीईआरटी की पुस्तकों के लिए सुरक्षा कवच तैयार

Thu, 22 May 2025 06:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने किताबों की पायरेसी करने वाले माफिया पर नकेल कसने के लिए एनसीईआरटी किताबों के लिए विशेष क्यूआर कोड का सुरक्षा कवच तैयार किया है।
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demo - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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अब किताब माफिया राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों की नकल (पायरेसी) नहीं कर पाएगा। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने किताबों की पायरेसी करने वाले माफिया पर नकेल कसने के लिए एनसीईआरटी किताबों के लिए विशेष क्यूआर कोड का सुरक्षा कवच तैयार किया है।

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आईआईटी के इस क्यूआर कोड के सुरक्षा कवच को भेदना किसी भी माफिया के लिए आसान नहीं होगा। खास बात यह है कि किताब खरीदने से पहले छात्र या अभिभावक बिना किसी की मदद से सिर्फ एक एप से क्यूआर कोड को स्कैन करके किताब असली है या पायरेटेड, इसकी पहचान कर सकते हैं। एक साल में यूपी, गुजरात, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान समेत 13 राज्यों में 27 छापों में 15 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की पायरेटेड किताबें, पेपर, प्रिंटिंग मशीन जब्त की हैं।

केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मार्केट में एनसीईआरटी किताबों के बीच पायरेटेड किताबें भी धड़ाधड़ बिक रही हैं। यह देखने में हूबहू एनसीईआरटी की असली किताबों की तरह ही लगती हैं। इनकी पहचान करना एनसीईआरटी के लिए भी मुश्किल हो रहा था। क्योंकि किताब माफिया ने वर्ष 2003 में एनसीईआरटी की किताबों में प्रयोग होने वाले सुरक्षा कवच ' वाटर मार्क पेपर ' को कॉपी कर लिया है। 
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इसके कारण असली और पायरेटेड किताब में आम आदमी के साथ -साथ दुकानदारों को भी फर्क करना मुश्किल है। इसीलिए एनसीईआरटी ने अपनी किताबों को पुस्तक नकल माफिया से बचाने को आईआईटी से विशेष सुरक्षित तकनीक ईजाद करवाने पर बात की थी। इसी के आधार आईआईटी कानपुर ने यह तकनीक ईजाद की है।

10 लाख किताबों को मिला कवच
शैक्षणिक सत्र 2025-26 के तहत पहले चरण के पायलट प्रोजेक्ट में कक्षा चौथी और सातवीं की 10 लाख किताबों को क्यूआर कोड को सुरक्षा कवच मिला है। आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार विशेष क्यूआर कोड ब्रेल लिपि की तरह उभरा हुआ है। इसे तैयार करने के लिए आईआईटी के विशेषज्ञों ने विशेष स्याही (स्याही तैयार करने वाली तकनीक भी आईआईटी की है) भी ईजाद की है, जिसका पेटेंट भी करवा रखा है।

इसलिए इसको कॉपी नहीं किया जा सकेगा। क्यूआर कोड का पूरा डाटा एनसीईआरटी सर्वर पर सुरक्षित रहता है। हर विषय की किताब की प्रति कॉपी का कोड अलग-अलग है। जैसे ही कोई क्यूआर कोड को चेको (सीएचईसीकेओ) एप के माध्यम से स्कैन करता है तो एनसीईआरटी सर्वर से वैरिफाई होकर किताब का कोड नंबर सामने आ जाता है। उदाहरण के तौर पर राजनीति विज्ञान की एक कॉपी का क्यूआर कोड बीओ 2271.8वाई है तो इसी कक्षा की पॉलिटिक्ल साइंस की दूसरी कॉपी का क्यूआर कोड बीओ 2291.5 जेएस यानी अलग रहेगा।
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दिल्ली समेत एनसीआर में माफिया सबसे अधिक सक्रिय
देशभर में दिल्ली-एनसीआर में सबसे अधिक किताब माफिया सक्रिय है। यह एनसीईआरटी किताबें पायरेटिड करके दुकानों को सप्लाई करते हैं। इसीलिए पिछले एक साल में एनसीईआरटी टीम ने दिल्ली के स्वरूपनगर, न्यू उस्मानपुर व समयपुर बादली, यूपी के नोएडा, गाजियाबाद, साहिबाबाद, लोनी, हापुड़ व अलीगढ़, हरियाणा के चरखी-दादरी, पलवल, ग्रुरुग्राम व फरीदाबाद, राजस्थान के जयपुर व भिवाड़ी, असम के गुवाहाटी, ओडिशा के भुवनेश्वर, मध्य प्रदेश के जबलपुर, केरल के एर्नाकुलम, बिहार के पटना, गुजरात में अहमदाबाद, पश्चिम बंगाल में खड़गपुर, झारखंड के रांची में 27 जगह छापे मारकर करोड़ों रुपये की पायरेटेड किताबें जब्त की हैं।

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