सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा सरकार की ओर से पास किए गए पंजाब भू परीक्षण संशोधन (पीएलपीए) विधेयक-2019 पर रोक लगाने के बाद पर्यावरणविदों में उत्साह है।
गुरुग्राम समेत दिल्ली-एनसीआर में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से एकजुटता दिखाकर पर्यावरणप्रेमी राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। पर्यावरणविदों के मुताबिक, इस मामले में अरावली में निर्माण के पूर्णत: प्रतिबंध के लिए जनहित याचिकाएं दायर की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शनिवार को भी सेव अरावली संस्था की ओर से सदस्यों ने सेक्टर-29 स्थित हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन के पास राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। साथ ही शहर में कई जगहों पर लोगों ने अरावली बचाने के लिए टोपी और बैनर लेकर प्रदर्शन किया।
सोशल मीडिया पर चलाई जा रही मुहिम
अरावली बचाने के लिए गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत अलग-अलग शहरों में चल रहे अभियान के साथ सोशल मीडिया पर भी मुहिम चलाकर राज्य सरकार के फैसले का विरोध किया जा रहा है। फेसबुक, ट्विटर पर सेव अरावली पेज और अकाउंट के साथ अरावली में गुरुग्राम क्षेत्र में 17 हजार एकड़ में निर्माण से पर्यावरण के नष्ट होने का खतरे के संदेश प्रधानमंत्री समेत विपक्षी दलों और राज्य सरकार को टैग करते हुए प्रेषित किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए पीएलपीए में संशोधन किया जो बेहद गैर जिम्मेदाराना है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाकर जता दिया कि पर्यावरण को लेकर सभी की जिम्मेदारी बनती है। अभी लड़ाई बाकी है, सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
आरपी बलवान, सेवानिवृत्त वन संरक्षक
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। सरकार जब तक पीएलपीए-2019 का फैसला वापस नहीं लेती हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। हम अरावली को इस तरह नहीं मिटने देंगे, राज्य सरकार के बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर करेंगे। - जितेंद्र भड़ाना, संस्थापक, सेव अरावली
सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जता दिया कि दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है। इसके लिए मैं सुप्रीम कोर्ट का आभार प्रकट करती हूं। जब तक सरकार पीएलपीए संशोधन-2019 के फैसले को वापस नहीं लेती हमारी लड़ाई जारी है। - लतिका ठुकराल, पर्यावरणविद
राज्य सरकार पर्यावरण को उजाड़ने की पूरी कोशिश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी अरावली में खनन नहीं रुका तो राष्ट्रीय मतदाता परिषद् समेत अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। - सतीश मराठा, पर्यावरण प्रेमी