आचार संहिता लागू होने के बाद सोशल साइट भी खाकी के राडार हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर आदि पर किसी भी पार्टी का प्रचार, आपत्तिजनक टिप्पणी करना आपको महंगा पड़ सकता है।
पुलिस न केवल ऐसे मामलों में आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज करेगी, बल्कि भड़काऊ टिप्पणी करने या सामग्री अपलोड करने पर भी कार्रवाई करेगी।
सोशल साइट के देश भर में मजबूती से जड़ें जमा लेने के बाद यह पहला लोकसभा चुनाव होने जा रहा है। सोशल साइट आज के दौर में प्रचार और संदेश पहुंचाने का बड़ा जरिया है।
खासतौर से शिक्षित वर्ग। कम खर्च में अधिक प्रचार-प्रसार होने के कारण सोशल साइट की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। शायद की कोई नेता या कार्यकर्ता होगा जो सोशल साइट से जुड़ा न हो।
इसके चलते पुलिस की नजर अब सोशल साइटों पर भी गड़ गई है। पुलिस सोशल साइटों को खंगाल रही है और उन पर अपलोड की जा रही सामग्री छान रही है।
पुलिस का मानना है कि सोशल साइट के जरिए असामाजिक तत्व कभी भी ऐसा दुष्प्रचार कर सकता है, जिससे क्षेत्र की फिजा खराब हो जाए। वहीं, कुछ लोग आचार संहिता का उल्लंघन कर राजनीतिक पार्टी का प्रचार कर सकते हैं।