लॉकडाउन-4 में दफ्तरों के खुलने का आदेश मिलने के बाद सड़कों पर सुबह-शाम भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है। दिल्ली के कई इलाकों में गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें रेंगती नजर आ रही हैं। जाम लगने के पीछे बॉर्डरों पर चेकिंग को बताया जा रहा है, जबकि दिल्ली से नोएडा में प्रवेश की इजाजत बगैर आवश्यक पास वालों को नहीं दी जा रही।
इसकी वजह से नोएडा जाने वालों को वापस अपने घरों के लिए लौटना पड़ रहा है। बुधवार शाम को भी ऑफिस बंद होने के बाद काफी जाम रहा। हर कोई घर की ओर भागने की जल्दी में दिखा। विकास मार्ग स्थित यमुना ब्रिज पर बुधवार को भारी ट्रैफिक जाम दिखाई दिया।
श्रमिकों की आवाजाही के चलते दिल्ली-यूपी गाजीपुर-गाजियाबाद सीमा पर जाम जैसे हालात बने हुए हैं। कालिंदी कुुंज के रास्ते होते हुए नोएडा-फरीदाबाद जाने वालों को भी घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा। बैराज के पास गाड़ियां घंटों जाम में फंसी रहीं। एनएच-24, डीएनएडी, आश्रम, रोहिणी, द्वारका, चांदनी चौक, लक्ष्मी नगर और आईटीओ सहित कई अन्य रास्तों पर जाम की समस्या देखने को मिली।
वहीं पुलिस भी अचानक बढ़े इस ट्रैफिक के दबाव से परेशान दिख रही है। ट्रैफिक को सामान्य करने में पुलिस को काफी मशक्कत लग रही है। पुलिस का कहना है कि यात्रा करने के लिए अभी दूसरे साधन पूरी तरह से नहीं चल रहे हैं, जिसकी वजह से सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या अधिक देखने को मिल रही है।
सड़कों पर दिख रहा मजदूरों का जमावड़ा
जाम का एक बड़ा कारण प्रवासी श्रमिक भी हैं, दरअसल गाजियाबाद व नोएडा के दादरी से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने की सूचना के बाद वह पैदल ही स्टेशनों की ओर चल पड़े हैं। सड़कों पर चल रहे यह मजदूर दिल्ली व हरियाणा के कई जिलों से पैदल ही हाईवे पर चल रहे हैं। इन मजदूरों की वजह से वाहनों की रफ्तार भी थम गई है। गाजीपुर और सीमापुरी बॉर्डर पर आधी से ज्यादा सड़कों पर मजदूरों का कब्जा है।
लॉकडाउन में छूट के बाद दिल्ली के बाजारों को सम-विषम नियम से खोला गया है। कई व्यापारी अब इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस नियम से कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा ग्राहकों को भी परेशानी होगी। सरकार को सभी दुकानों को एक साथ खोलने की अनुमति देनी चाहिए। खान मार्केट व्यापार संघ के अध्यक्ष संजीव मेहरा का कहना है कि अधिकतर ग्राहक ऐसे हैं। जो दुकानों को नंबर से नहीं, बल्कि नाम से जानते हैं।
ऑड-ईवन नियम से वे असमंजस की स्थिति में रहेंगे। जब दुकानदारों को पूरे महीने का किराया और बिल देना है। इसके अलावा टैक्स भी पूरा ही लिया जाएगा। फिर दुकानों को पूरे महीने खोलने की अनुमित क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि व्यापार संघ ने इस संबंध में दिल्ली के उपराज्यपाल को एक पत्र लिखा है। जिसमें मांग की गई है की बाजारों को खोलने में ऑड-ईवन नियम का प्रयोग न किया जाए।