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...तो अब फेसबुक बचाएगा अरावली की खूबसूरती

Fri, 31 Jan 2014 11:34 AM IST
ओम प्रकाश/ अमर उजाला, फरीदाबाद
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फरीदाबाद में भू-माफियाओं के हाथों छलनी होती अरावली की वादियों को बचाने के लिए अब पर्यावरण प्रेमी सोशल नेटवर्किंग साइट का सहारा लेंगे। इसके लिए उन्होंने फेसबुक पेज बनाया है।
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इस माह अब तक अरावली में पेड़ काटने एवं संरक्षित क्षेत्र में निर्माण करने के खिलाफ वन विभाग फॉरेस्ट एक्ट के तहत 13 एफआईआर दर्ज करवा चुका है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भू-माफिया किस कदर पर्यावरण से खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं।

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इसके बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण बंद नहीं हुए हैं। पहाड़ों को काटकर समतल किया जा रहा है और बाउंड्री करवाई जा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने गैर वानिकी गतिविधियों पर रोक लगाई हुई है।
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इसे लेकर अरावली वन्य जीवन बचाओ संघर्ष समिति के लोग तीन बार प्रदर्शन कर चुके हैं। जिला उपायुक्त से लेकर वन अधिकारी तक को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन धरातल पर कहीं कोई काम नहीं रुका है, इसलिए अब समिति ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर समर्थन जुटाने की मुहिम शुरू की है।

समिति से जुड़े रवींद्र बिधूड़ी ने बताया कि अरावली बचाओ समिति के नाम से फेसबुक पर अकाउंट खोला गया है। अरावली वन्य जीवन बचाओ समिति के नाम से पेज बनाया गया है। उन्होंने बताया कि जहां-जहां भी अरावली में पेड़ काटे जा रहे हैं, वहां-वहां की फोटो इस पर डाली जाएंगी, ताकि लोग देखें कि अधिकारी कैसे इस संवेदनशील मुद्दे पर आंख मूंदे हुए हैं।

ग्रीन ट्रिब्युनल जाने की तैयारी
समिति से जुड़े लोग अब इस मसले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में जाने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें लगता नहीं कि प्रशासन अरावली को बचाने के लिए कोई गंभीर पहल कर रहा है। एक-दो दिन में दिल्ली जाकर पर्यावरण प्रेमी शिकायत देंगे।
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किस गांव में कितना है वन संरक्षित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
बड़खल---------------------470
कोट-----------------------642
मांगर----------------------473
मेवला महाराजपुर----------478
मोहब्बताबाद---------------246
पाली-----------------------405
खोरी-जमालपुर-------------232
लकड़पुर -------------------146
अनंगपुर--------------------180
धौज ----------------------151
भाखरी ---------------------42
शिलावरी--------------------66
सिरोही----------------------84
सराय ख्वाजा --------------21
(स्रोत: वन विभाग)
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