बाबरी मस्जिद ढहाए जाने का बदला लेने के लिए इरफान अहमद उर्फ पप्पू व उसके साथियों ने दिल्ली से हावड़ा जाने व आने वाली राजधानी ट्रेनों में कानपुर, उत्तरप्रदेश में बम लगाए थे।
इरफान ने खुलासा किया है कि राजधानी ट्रेनों में बम इसलिए लगाए गए थे कि इन ट्रेनों में अमीर व वीआईपी लोग सफर करते हैं। बम धमाके से ज्यादा वीआईपी व अमीर लोग मरेंगे।
इससे ये राष्ट्रीय समाचार बनेगा और समाज में मस्जिद न ढहाने का एक मैसेज जाएगा। दिल्ली पुलिस ने इरफान को 14 दिन की पुलिस रिमांड पर ले रखा है।
पुलिस ये जानने की कोशिश कर रही है कि उसकी भारत आने की आगे की रणनीति क्या थी। क्या उसने नेपाल जेल से भागने के बाद किसी लश्कर आका से संपर्क किया था।
ये इरफान के आंतकी बनने की कहानी
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि बाबरी मजिस्द ढहाए जाने के बाद बदला लेने के लिए कई छोटे-छोटे ग्रुप बनाए गए थे। बाद में ये ग्रुप लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गए थे।
सभी ग्रुप ने अलग-अलग जगह बम लगाए थे। कक्षा चार तक पढ़े इरफान के पिता किसान थे। इनके पास 19 बीघा जमीन थी। जब ये 16 वर्ष का था जब उसकी मौसी हसरत जहां इसे बहराइच से लखनऊ ले गई थीं।
लखनऊ में ये अपने मौसा के साथ उनकी फूल की दुकान पर काम करने लगा। वर्ष 1982 में इसकी शादी जरीना खातून से हो गई थी। इरफान के तीन बच्चे हैं।
बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने के बाद ये पड़ोसी जमाल अल्वी के संपर्क में आया। जमाल अल्वी उसका उर्दू, हिंदी व अंग्रेजी का ट्यूटर था।
पाकिस्तान भाग जाना चाहता था आतंकी
इसके बाद ये जमाल की संस्था मुजाहिदीन इस्लाम अलहिंद में शामिल हो गया। इस संस्था की बैठक जमाल के घर पर हुई थी। जिस दिन कानपुर में राजधानी ट्रेनों में बम लगाए थे उसी दिन देश के कई शहरों में ट्रेनों समेत अन्य जगहों पर बम लगाए थे।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक वर्ष 2010 में नेपाल में पकड़े जाने के बाद ये हमेशा पाकिस्तान भाग जाना चाहता था। इसके लिए इसने तैयारी भी कर ली थी। नेपाल में 25 अप्रैल को भूकंप आया था। ये 27 अप्रैल को जेल से भाग निकला था।
जेल से भागने के बाद ये नेपाल के नेपालगंज पहुंचा। यहां वह मोइन अंसारी, जोकि जेल में उसके साथ बंद था, उससे मिला। 5 मई को ये नेपाल से बहराइच पहुंचा था। यहां ये एक रिश्तेदार के घर पहुंचा था। दिल्ली पुलिस की टीम ने उसे 7 मई को बहराइच से गिरफ्तार कर लिया था।